नई दिल्ली: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने उनकी मेडिकल जांच से संबंधित विस्तृत पैथोलॉजिकल रिपोर्ट पेश करने को कहा है। यह आदेश उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
तीन जगहों की जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने सफदरजंग अस्पताल, एम्स और निजी लैब में हुई जांचों की सभी पैथोलॉजिकल रिपोर्ट हलफनामे के साथ जमा करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल रिकॉर्ड की पूरी जानकारी जरूरी है, ताकि स्थिति को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
AIIMS अधिकारियों को भी सुनवाई में शामिल होने को कहा
हाई कोर्ट ने एम्स के प्रभारी निदेशक, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अक्षय और संबंधित कंसल्टिंग डॉक्टर को अगली सुनवाई के दौरान मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।
पत्नी ने लगाए थे जबरन अस्पताल में रखने के आरोप
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस उन्हें राजधानी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए सफदरजंग अस्पताल में रख रही है।यह याचिका उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें सिंगल जज ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
केंद्र ने कहा, स्वास्थ्य सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी
केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि सरकार की चिंता केवल यह सुनिश्चित करना है कि वांगचुक के स्वास्थ्य या जीवन को कोई खतरा न हो।उन्होंने दलील दी कि अगर किसी व्यक्ति की सेहत खराब होने की स्थिति का असर कानून व्यवस्था पर पड़ता है, तो वहां राज्य की भूमिका बन जाती है।
विरोध के अधिकार और जिम्मेदारी पर हुई बहस
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जिससे जीवन को खतरा पैदा हो।उन्होंने कहा कि यह मामला इच्छामृत्यु से जुड़ा नहीं है, बल्कि ऐसे व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ा है जिसकी तबीयत बिगड़ने की आशंका हो सकती है। कोर्ट अब मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगा।

