जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या के बाद प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे दो आतंकियों के मकानों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात की गई। जिन लोगों के मकानों पर कार्रवाई हुई, उनकी पहचान आदिल ठोकर और हारून रशीद गनई के रूप में हुई है।
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के दौरान हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या
यह कार्रवाई उस हमले के कुछ घंटों बाद की गई, जिसमें लाल चौक इलाके में तैनात हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह उस समय अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में ड्यूटी कर रहे थे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
करीब एक साल बाद फिर अपनाई गई सख्त रणनीति
कश्मीर में पहले भी आतंकियों से जुड़े बताए जाने वाले मकानों और संपत्तियों पर कार्रवाई होती रही है। हालांकि पिछले लगभग एक वर्ष से हिंसक घटनाओं में कमी आने के कारण इस तरह की कार्रवाई बंद थी। ताजा हमले के बाद प्रशासन ने फिर से कड़ा रुख अपनाया है।
सैकड़ों संदिग्ध हिरासत में, आतंकी नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा
पुलिसकर्मी की हत्या के बाद श्रीनगर पुलिस ने आतंकवाद समर्थक नेटवर्क के खिलाफ व्यापक तलाशी और छापेमारी अभियान शुरू किया। इस दौरान करीब 700 संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आतंकियों तक हथियार, धन, परिवहन, संचार और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था कौन कर रहा था।
कई इलाकों में एक साथ चलाया गया सर्च ऑपरेशन
जांच के दौरान सुरक्षा बलों ने जिले के कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाकर संभावित साक्ष्य जुटाए। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य आतंकी संगठनों के पूरे सपोर्ट नेटवर्क को खत्म करना और भविष्य में किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम करना है।
कार्रवाई पर उठे सवाल भी
आतंकियों से जुड़े मकानों को गिराने की नीति पर विपक्षी दलों और कुछ नागरिक अधिकार संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई का असर उन परिवार के सदस्यों पर भी पड़ता है, जिन पर किसी तरह का आपराधिक आरोप नहीं है। वहीं प्रशासन का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है।

