भारतीय संसद में अब आधुनिक तकनीक की मजबूत दस्तक दिखाई देने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुवाद और स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम को संसदीय कार्यों में परीक्षण के तौर पर शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में पारंपरिक मानव अनुवादकों की भूमिका को चुनौती दे सकती है और संसदीय कामकाज को और अधिक तेज, सटीक और मल्टी-लिंगुअल बनाने में मदद करेगी।
सूत्रों के अनुसार, संसद सचिवालय ने विभिन्न AI टूल्स का डेमो लिया है, जिनकी सहायता से सांसदों के भाषणों का रियल-टाइम अनुवाद 22 से अधिक भाषाओं में किया जा सकता है। फिलहाल यह तकनीक परीक्षण चरण में है और इसकी सटीकता, विश्वसनीयता तथा व्यवहारिक उपयोगिता की जांच की जा रही है।
AI सिस्टम के जरिए न केवल भाषणों का अनुवाद आसान होगा, बल्कि पूरे सत्र का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, नोट्स बनाना और दस्तावेज़ों को तेजी से भाषा-परिवर्तित करना भी अधिक सरल होगा। संसद अधिकारियों का कहना है कि यदि ट्रायल सफल रहा तो यह तकनीक संसदीय दक्षता में बड़ा सुधार ला सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया है कि पूरी तरह AI पर निर्भरता मानव अनुवादकों की नौकरी और भाषाई संवेदनशीलता के लिए चुनौती साबित हो सकती है। कई वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि AI उपयोगी है, लेकिन संवैधानिक भाषणों और गहन राजनीतिक अभिव्यक्तियों में मानव अनुवाद की सटीकता अभी भी अधिक विश्वसनीय है।
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टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह स्पष्ट है कि संसद का कामकाज अब डिजिटल और स्मार्ट दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आने वाले महीनों में यह फैसला महत्वपूर्ण होगा कि AI अनुवादक सहायक की भूमिका निभाएगा या पारंपरिक अनुवाद प्रणाली की जगह ले लेगा।