देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान AIIMS दिल्ली में इन दिनों डॉक्टरों और प्रशासन के बीच टकराव का माहौल बना हुआ है। हाल ही में फैकल्टी के एक बड़े वर्ग ने प्रशासन के कामकाज में हो रहे ‘अनुचित दखल’ और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रबंधन बार-बार चिकित्सा से जुड़ी नीतियों और कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे न केवल कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि संस्थान का अकादमिक और प्रोफेशनल माहौल भी बिगड़ता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस मामले को लेकर एम्स निदेशक से मुलाकात की है और एक लिखित शिकायत भी सौंपी है। उनका आरोप है कि प्रशासन फैकल्टी की राय लिए बिना कई महत्वपूर्ण फैसले ले रहा है, जिससे अस्पताल में समन्वय की कमी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। कुछ डॉक्टरों ने यहां तक कहा है कि लगातार प्रशासनिक दबाव के कारण चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
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इस विवाद के बाद एम्स प्रबंधन ने स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि संस्थान के भीतर अनुशासन और दक्षता बनाए रखने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी निर्णय का उद्देश्य डॉक्टरों के काम में बाधा डालना नहीं है।
AIIMS दिल्ली में यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टरों और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए हों। पहले भी कई बार कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असहमति की स्थितियां बनी हैं। लेकिन इस बार फैकल्टी की सामूहिक नाराजगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही दोनों पक्षों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो इसका असर न केवल संस्थान के वातावरण पर पड़ेगा बल्कि मरीजों की सेवाओं पर भी दिखाई दे सकता है।