उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत कर चुनावी अभियान का संकेत दिया है। खास बात यह है कि यात्रा के लिए रायबरेली को चुना गया, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है। ऐसे में सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन, सीट बंटवारे और दोनों दलों के चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सीटों की संख्या नही, जीत की संभावना को अखिलेश ने बताया अहम
अखिलेश यादव ने गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर अपनी रणनीति का संकेत देते हुए कहा कि केवल सीटों की संख्या तय करना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नही है। असली सवाल यह है कि किसी खास विधानसभा क्षेत्र में किस दल की जीत की संभावना ज्यादा है।
सपा प्रमुख के इस रुख से साफ है कि संभावित सीट बंटवारे में पार्टी क्षेत्रवार राजनीतिक स्थिति और जीत की क्षमता को प्रमुख आधार मानना चाहती है। यानी जिस क्षेत्र में जिस दल का संगठन और चुनावी आधार मजबूत हो, वहां उसे मैदान में उतारने की रणनीति पर जोर दिया जा सकता है।
रायबरेली से ही शुरुआत क्यों, सपा ने दिया संगठन मजबूत करने का संकेत
रायबरेली लंबे समय से कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक क्षेत्रों में शामिल रहा है। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का भी यहां अपना आधार रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने जिले की चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। बाद में ऊंचाहार से सपा विधायक मनोज पांडेय ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।
वर्तमान विधानसभा समीकरण में बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी सीटों पर सपा के विधायक है। ऐसे में रायबरेली से PDA रथ यात्रा शुरू करना पार्टी के लिए अपने संगठन और स्थानीय सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
PDA के साथ आधी आबादी पर भी फोकस, अखिलेश की रणनीति में विस्तार
समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति में PDA को लंबे समय से प्रमुख स्थान दिया गया है। पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक व्यापक सामाजिक गठजोड़ में जोड़ने पर जोर देती रही है।
अब अखिलेश यादव ने इस सामाजिक रणनीति के दायरे में महिलाओं को भी आधी आबादी के तौर पर शामिल करने की बात कही है। इससे पार्टी की कोशिश अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ महिला मतदाताओं तक भी राजनीतिक संदेश पहुंचाने की दिखाई दे रही है।
2024 के साथ के बाद 2027 में सीटों का तालमेल सबसे बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। इस गठबंधन के बाद अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीटों का तालमेल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
विधानसभा स्तर पर कई ऐसे क्षेत्र है जहां दोनों दल अपने संगठन और प्रभाव के आधार पर दावा कर सकते है। रायबरेली भी इसी तरह का क्षेत्र है, जहां कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक मौजूदगी के साथ सपा का विधानसभा स्तर पर अपना आधार मौजूद है।
PDA यात्रा से सपा ने चुनावी तैयारियों का रोडमैप दिखाया
अखिलेश यादव की रायबरेली से शुरू हुई यात्रा को केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम के तौर पर देखना पर्याप्त नही होगा। इसके जरिए सपा ने 2027 से पहले अपने सामाजिक गठजोड़, संगठन और संभावित गठबंधन रणनीति को लेकर शुरुआती संकेत भी दिए है।
अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और किन विधानसभा क्षेत्रों में दोनों दल अपने-अपने दावे मजबूत करते है।

