गणेश उत्सव के 12 दिवसीय आयोजन के बाद आज गणपति बप्पा को विदाई देने का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी मनाई जा रही है। इसी दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने की परंपरा है। मान्यता है कि शुभ समय में विधि-विधान से बप्पा की विदाई करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पूरे गणेश उत्सव के दौरान भक्तों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। अब अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धा के साथ गणपति की विदाई की जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है।
अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की परंपरा
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार इस सूत्र में 14 गांठें होती है और इसे भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
परंपरा के अनुसार पुरुष दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र बांधती है। धार्मिक मान्यताओं में इसे शुभता और रक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
गणेश विसर्जन के लिए 2026 में ये शुभ समय
अनंत चतुर्दशी के दिन अलग-अलग समय में गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त बताए गए है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय परंपरा के अनुसार इन समय का उपयोग कर सकते है।
- प्रातःकाल: सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक
- अपराह्न शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 1:44 बजे तक
- अपराह्न चर मुहूर्त: शाम 4:45 बजे से 6:15 बजे तक
- रात्रि लाभ मुहूर्त: रात 9:14 बजे से 10:44 बजे तक
कब शुरू और कब खत्म होगी अनंत चतुर्दशी तिथि
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 की रात 11:18 बजे से शुरू हुई और 25 सितंबर 2026 की रात 11:06 बजे समाप्त होगी। इस आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर को रखा जा रहा है।
गणेश विसर्जन से पहले ऐसे करें बप्पा की अंतिम पूजा
गणपति की विदाई से पहले घर में विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें और भगवान गणेश की पूजा करें।
गणेश जी को सिंदूर, अक्षत, दूर्वा और फूल अर्पित करें। इसके बाद मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई का भोग लगाएं। कपूर जलाकर आरती करें और पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भूल के लिए गणपति बप्पा से क्षमा प्रार्थना करें।
विसर्जन से पहले तैयार करें ये छोटी पोटली
गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले लाल या पीले कपड़े की एक छोटी पोटली तैयार की जा सकती है। इसमें अक्षत, पंचमेवा, मोदक, सुपारी और श्रद्धानुसार दक्षिणा रखी जाती है।
इसके बाद परिवार के सदस्य गणपति बप्पा की आरती करके प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल के लिए लेकर जाएं।
गणपति बप्पा की विदाई में इन बातों का रखें ध्यान
विसर्जन के दौरान भक्त गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ सकते है। पवित्र नदी, तालाब या प्रशासन की ओर से बनाए गए निर्धारित विसर्जन स्थल पर प्रतिमा को श्रद्धा के साथ विसर्जित करें।
प्रतिमा को विसर्जित करने से पहले एक बार फिर कपूर से आरती करना और भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

