गणेशोत्सव : पहले मुंबई के सार्वजनिक गणपति मंडलों को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछले वर्ष जारी अंतरिम व्यवस्था इस साल भी लागू रहेगी। इसका मतलब है कि पीओपी से बनी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर फिलहाल पिछले साल के नियम ही मान्य होंगे।न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के सामने इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका पर अंतिम फैसला आने तक 24 जुलाई 2025 को जारी अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।
छोटी और बड़ी मूर्तियों के लिए अलग व्यवस्था
24 जुलाई 2025 के आदेश के मुताबिक, छह फीट तक ऊंची गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया जाना है। वहीं छह फीट से अधिक ऊंची प्रतिमाओं को प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जित करने की अनुमति दी गई थी।हाई कोर्ट के ताजा स्पष्टीकरण के बाद इस साल भी इसी व्यवस्था के तहत गणेश विसर्जन की तैयारी की जाएगी। बड़ी पीओपी प्रतिमाओं के प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन को लेकर प्रशासन आवश्यक तैयारियां करेगा, जबकि छोटी प्रतिमाओं के लिए कृत्रिम विसर्जन कुंडों की व्यवस्था पर जोर रहेगा।
राज्य सरकार ने मांगा था कोर्ट से स्पष्टीकरण
दरअसल, पिछले शुक्रवार को जनहित याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद अंतरिम आदेश को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। राज्य सरकार ने बुधवार को कोर्ट के सामने इस व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।कोर्ट ने मामले को स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतिम फैसला आने तक 24 जुलाई 2025 का अंतरिम आदेश ही लागू रहेगा। इससे गणपति मंडलों और प्रशासन के सामने विसर्जन व्यवस्था को लेकर बनी स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है।
अंतिम फैसला आने तक यही नियम जारी रहेंगे
हाई कोर्ट ने फिलहाल पीओपी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर कोई नई व्यवस्था लागू नहीं की है। जब तक जनहित याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक पिछले वर्ष का अंतरिम आदेश ही प्रभावी रहेगा।इस फैसले से मुंबई में गणेशोत्सव की तैयारियों में जुटे सार्वजनिक गणपति मंडलों को फिलहाल राहत मिली है और प्रतिमाओं के आकार के अनुसार विसर्जन की व्यवस्था पहले से तय नियमों के मुताबिक की जा सकेगी।

