रायपुर: महानदी जल बंटवारे को लेकर पिछले 43 वर्षों से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में गुरुवार को नई दिल्ली में अहम पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी पहली बार एक साथ बैठे और स्थायी समाधान के लिए संवाद, सहयोग तथा वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई।
दोनों राज्यों ने दिखाई सहमति की इच्छा
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल विवाद का विषय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की जरूरतों का सम्मान करता है, लेकिन राज्य के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित इलाकों और भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी बैठक के बाद उम्मीद जताई कि यदि बातचीत इसी तरह आगे बढ़ी तो दिवाली तक विवाद के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति संभव है।
सीएम साय ने रखे चार महत्वपूर्ण सुझाव
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में भविष्य उन्मुख जल प्रबंधन के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली बनाने, जल उपलब्धता और उपयोग की नियमित समीक्षा के लिए स्थायी संस्थागत व्यवस्था तैयार करने, प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिकतम मामलों का समाधान करने तथा केंद्र सरकार से समयबद्ध कार्ययोजना और दीर्घकालिक समझौते का मसौदा तैयार कराने का आग्रह किया।
उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से निष्पक्ष तकनीकी सहयोग देने की भी अपील की।
1983 से चला आ रहा है महानदी जल विवाद
महानदी जल बंटवारे का विवाद वर्ष 1983 में तत्कालीन मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच शुरू हुआ था। वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ में बैराज निर्माण को लेकर यह विवाद और गहरा गया। इसके बाद 12 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया।
ओडिशा का कहना है कि छत्तीसगढ़ की परियोजनाओं से हीराकुंड बांध में गैर-मानसून अवधि के दौरान पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। वहीं छत्तीसगढ़ का तर्क है कि महानदी के कुल जलग्रहण क्षेत्र का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा उसके राज्य में होने के कारण उसे अपने हिस्से के जल उपयोग का अधिकार है।
समाधान से दोनों राज्यों को मिलेगा लाभ
यदि विवाद का स्थायी समाधान निकलता है तो छत्तीसगढ़ को सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक परियोजनाओं के विस्तार में स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा। वहीं ओडिशा में हीराकुंड जलाशय का जलस्तर बेहतर बनाए रखने, गैर-मानसून अवधि में जल उपलब्धता बढ़ाने और नदी के निचले हिस्से के पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

