Air India फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त 2026 को एक गंभीर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई, जिसने कुछ पल के लिए यात्रियों और क्रू मेंबरों की सांसें रोक दीं। उड़ान के दौरान विमान अचानक लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस घटना में 17 यात्रियों और कुछ क्रू सदस्यों को चोटें आईं, हालांकि पायलट ने स्थिति संभालते हुए विमान को सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पर उतार लिया।
DFDR की शुरुआती जांच में सामने आया तकनीकी कारण
घटना की जांच के दौरान डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) से मिले शुरुआती आंकड़ों में पता चला है कि विमान के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने करीब 4 सेकंड तक प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया था। इसी वजह से विमान कुछ समय के लिए पायलट के नियंत्रण से बाहर हो गया।
किन सिस्टमों ने एक साथ जवाब दे दिया?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, एयरबस A320neo के तीन महत्वपूर्ण कंट्रोल सिस्टम एक साथ प्रभावित हुए।
- एलिवेटर्स, जो विमान की नाक को ऊपर-नीचे नियंत्रित करते हैं।
- एलेरॉन्स, जो विमान को दाएं और बाएं मोड़ने में मदद करते हैं।
- स्पॉयलर्स, जो उड़ान के दौरान गति और संतुलन नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों सिस्टम से जुड़े हाइड्रोलिक कंट्रोल में एक साथ गड़बड़ी दर्ज की गई, जिससे विमान के संचालन पर कुछ सेकंड के लिए असर पड़ा।
4 सेकंड तक पायलट के नियंत्रण से बाहर रहा विमान
जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 4 सेकंड तक एलिवेटर्स और एलेरॉन्स बिना किसी पायलट कमांड के स्वतः ड्रिफ्ट करते रहे। इसी दौरान ऑटोपायलट सिस्टम भी डिस्कनेक्ट हो गया। इसके परिणामस्वरूप विमान अचानक लगभग 300 फीट नीचे आ गया और यात्रियों को तेज झटका महसूस हुआ।
137 यात्री थे सवार, सुरक्षित हुई लैंडिंग
घटना के समय विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य मौजूद थे। अचानक आए झटके से कई यात्रियों और क्रू मेंबरों को मामूली चोटें आईं। हालांकि पायलट ने विमान पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया और उड़ान जारी रखते हुए दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
जांच अभी जारी
इस घटना के बाद विमान की तकनीकी प्रणाली और हाइड्रोलिक कंट्रोल की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी के संकेत मिले हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल जांच एजेंसियां DFDR और अन्य तकनीकी डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सके।

