हैदराबाद। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को लेकर भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा नेता और अधिवक्ता करुणासागर ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे हंगामे की वजह से कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि संसद का समय बाधित होने से राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दे लंबित रह गए हैं।
‘सिर्फ चार कार्यदिवस बचे, फिर भी चर्चा नहीं हो रही’
करुणासागर ने कहा कि मानसून सत्र समाप्त होने में अब बहुत कम समय बचा है, लेकिन संसद में आवश्यक विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, बार-बार के व्यवधानों के कारण महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे संसदीय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर चर्चा की बताई जरूरत
भाजपा नेता ने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना था कि इन विषयों पर गंभीर चर्चा आवश्यक है, क्योंकि इनका संबंध लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा हुआ है।
FCRA संशोधन को बताया पारदर्शिता से जुड़ा कदम
करुणासागर ने विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। उनके मुताबिक ऐसे विषयों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी पक्ष अपनी राय रख सकें।
विपक्ष से की सदन में चर्चा करने की अपील
उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसे संसद के भीतर बहस के माध्यम से रखा जाए। उनका कहना था कि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है और जनता भी इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रही है।
क्या हैं FCRA संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रस्ताव
संसद में दोबारा पेश किए गए विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत एक ‘नामित प्राधिकरण’ गठित करने का प्रावधान है, जो उन संस्थाओं की विदेशी सहायता और उससे अर्जित संपत्तियों की निगरानी करेगा, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है, समाप्त हो गया है या उन्होंने उसे वापस कर दिया है।
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि यदि ऐसी संपत्तियों में कोई धार्मिक स्थल शामिल हो तो उसके धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा कुछ कानूनी उल्लंघनों के मामलों में अधिकतम सजा को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष किए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

