रायपुर। राजधानी रायपुर के माना स्थित नकटी गांव में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चल रहे विवाद के बीच छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि नकटी क्षेत्र में विधायक कॉलोनी बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उनका कहना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद हो रहा है, उसका हाउसिंग बोर्ड से कोई संबंध नहीं है और वह राजस्व विभाग की शासकीय भूमि है।
‘हाउसिंग बोर्ड की नहीं, राजस्व विभाग की जमीन’
मीडिया से बातचीत में अनुराग सिंह ने कहा कि विवादित भूमि हाउसिंग बोर्ड के अधीन नहीं आती। उनके मुताबिक यह राजस्व विभाग की सरकारी जमीन है, जिस पर लंबे समय से अतिक्रमण की शिकायतें थीं। प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई की है और इसका विधायक कॉलोनी से कोई संबंध नहीं है।
2022 से सामने आ रहा था अतिक्रमण का मामला
हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2022 में इस क्षेत्र की करीब तीन हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पाया गया था। इसके बाद वर्ष 2023 और 2024 में भी अन्य हिस्सों में अवैध कब्जे होने की जानकारी सामने आई। उन्होंने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग 29 हजार वर्गफीट सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था।
हाईकोर्ट भी मान चुका है शासकीय भूमि
अनुराग सिंह ने कहा कि संबंधित भूमि को लेकर न्यायिक प्रक्रिया भी हो चुकी है और हाईकोर्ट इसे शासकीय भूमि मान चुका है। ऐसे में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के अनुरूप की गई है।
‘विधायक कॉलोनी की बात भ्रामक’
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक मंचों पर विधायक कॉलोनी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रस्ताव तैयार ही नहीं किया गया है। लोगों को तथ्यों के आधार पर जानकारी लेने की जरूरत है।
कांग्रेस पर लगाए राजनीतिक आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान अनुराग सिंह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि जनभावनाओं को भड़काकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
बलौदाबाजार की घटना का भी किया जिक्र
हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन हुए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय छेड़ीखेड़ी क्षेत्र से करीब 150 अतिक्रमणकारियों को हटाया गया था और बाद में 61 विधायकों को जमीन आवंटित की गई थी। साथ ही उन्होंने उस आंदोलन के दौरान एक किसान की मौत का भी उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
विवाद पर बयानबाजी जारी
नकटी गांव की कार्रवाई को लेकर प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की सामान्य कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। फिलहाल मामले पर राजनीतिक बयानबाजी थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

