देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है। रायपुर में आयोजित DGP–IG कॉन्फ्रेंस में लिए गए अहम निर्णयों ने न केवल सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती देने का रोडमैप तैयार किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय सुरक्षा चिंतन का महत्वपूर्ण केंद्र रहेगा।
कॉन्फ्रेंस में शीर्ष पुलिस, सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों ने देश की सुरक्षा स्थिति, उभरते जोखिम, तकनीकी चुनौतियों और ग्राउंड-लेवल कानून व्यवस्था के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। विशेष तौर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा रणनीति, साइबर अपराध, ड्रोन निगरानी, आतंकी नेटवर्क की पहचान, और अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में लिए गए निर्णयों से देश की आंतरिक सुरक्षा संरचना में कई महत्वपूर्ण सुधार होंगे। इनमें अत्याधुनिक तकनीक को पुलिस संचालन का अनिवार्य हिस्सा बनाना, राज्य और केंद्र एजेंसियों के बीच तेज समन्वय व्यवस्था स्थापित करना और कठिन इलाकों में सुरक्षा तैनाती को मजबूत करना शामिल है।
छत्तीसगढ़ को सम्मेलन की मेजबानी मिलने को विशेषज्ञ एक अहम संकेत मानते हैं। उनका कहना है कि राज्य ने नक्सल चुनौती से निपटने में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सफलता पाई है, और अब यह अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
कॉन्फ्रेंस में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य के खतरों से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी, डेटा इंटीग्रेशन, और स्मार्ट पुलिसिंग को तेजी से लागू किया जाएगा। साथ ही, जमीनी स्तर पर काम कर रहे जवानों के लिए उन्नत प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
नीतिगत विशेषज्ञों का मानना है कि DGP कॉन्फ्रेंस के ये निर्णय देश की आंतरिक सुरक्षा को एक नई दिशा देंगे और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में स्थायी शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।