नई दिल्ली। इस बार मानसून की मेहरबानी का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजधानी की हवा भी पहले की तुलना में काफी स्वच्छ हो गई है। लगातार हो रही बारिश और अनुकूल मौसम की वजह से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। कोरोना महामारी के दौरान लगे प्रतिबंधों वाले वर्ष को छोड़ दें तो पिछले 11 वर्षों में इस साल सबसे अधिक स्वच्छ हवा वाले दिन रिकॉर्ड किए गए हैं।
बारिश ने घटाया प्रदूषण का असर
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश से वातावरण में मौजूद धूल और सूक्ष्म प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाते हैं, जिससे हवा साफ होती है। इसके साथ ही तेज हवाओं ने भी प्रदूषण के कणों को फैलाकर उनकी सघनता कम करने में मदद की है। यही वजह है कि राजधानी में इन दिनों लोगों को अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता का अनुभव हो रहा है।
दिल्ली लंबे समय से झेल रही है प्रदूषण की समस्या
राष्ट्रीय राजधानी वर्षों से वायु प्रदूषण की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। सर्दियों के मौसम में वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी वजहों से प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। ऐसे में इस वर्ष अच्छी बारिश ने प्राकृतिक रूप से राहत पहुंचाई है।
तेज हवाओं ने भी निभाई अहम भूमिका
मौसम में आए बदलाव और बारिश के साथ चलने वाली हवाओं ने भी वायु गुणवत्ता सुधारने में योगदान दिया है। हवा की गति बढ़ने से प्रदूषक कण किसी एक स्थान पर जमा नहीं हो पाते, जिससे वातावरण में उनका प्रभाव कम हो जाता है।
11 वर्षों में सबसे बेहतर स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल को छोड़कर पिछले 11 वर्षों में इस साल सबसे अधिक साफ हवा वाले दिन दर्ज किए गए हैं। महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से वाहनों और उद्योगों की गतिविधियां सीमित होने से हवा में असाधारण सुधार देखा गया था। अब सामान्य जनजीवन और नियमित यातायात के बावजूद वायु गुणवत्ता का बेहतर होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोगों को मिल रही राहत
स्वच्छ हवा का सीधा लाभ राजधानी के लोगों को मिल रहा है। प्रदूषण का स्तर घटने से सांस लेने में आसानी महसूस हो रही है और आंखों में जलन, गले में खराश तथा श्वसन संबंधी परेशानियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम हुआ है। सुबह और शाम के समय खुले वातावरण में टहलने वाले लोगों के लिए भी यह सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
सर्दियों में फिर बढ़ सकती है चुनौती
हालांकि फिलहाल बारिश ने प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून समाप्त होने और सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता फिर प्रभावित हो सकती है। ठंडी हवा, कम वायु प्रवाह और पराली जलाने जैसी गतिविधियां एक बार फिर प्रदूषण बढ़ा सकती हैं।
स्थायी समाधान पर देना होगा जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बारिश के भरोसे वायु गुणवत्ता को लंबे समय तक बेहतर नहीं रखा जा सकता। इसके लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त निगरानी जैसे स्थायी उपाय जरूरी हैं।
फिलहाल राहत, आगे भी रहेगी नजर
फिलहाल राजधानी में साफ हवा लोगों के लिए राहत लेकर आई है। कोरोना काल को छोड़कर 11 वर्षों में सबसे अधिक स्वच्छ वायु वाले दिनों का रिकॉर्ड इस बात का संकेत है कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियां प्रदूषण कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि मानसून के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता कितनी संतुलित बनी रहती है।

