नई दिल्ली। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) 1 सितंबर 2026 से नॉमिनेशन से जुड़े नए नियम लागू करेगा। यह बदलाव खास तौर पर सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो रखने वाले निवेशकों के लिए है। इसका उद्देश्य नॉमिनेशन प्रक्रिया को सरल बनाना और निवेशक के निधन की स्थिति में संपत्ति के हस्तांतरण को आसान बनाना है।
1 सितंबर से नॉमिनेशन या ऑप्ट-आउट होगा अनिवार्य
सेबी के नए नियमों के तहत अब किसी भी सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन की जानकारी खाली नहीं छोड़ी जा सकेगी।
निवेशकों के पास दो विकल्प होंगे।
- किसी एक या अधिक नॉमिनी का नाम दर्ज करें।
- यदि नॉमिनी नहीं बनाना चाहते हैं, तो निर्धारित घोषणा पत्र के माध्यम से आधिकारिक रूप से ‘ऑप्ट-आउट’ करें।
वहीं, संयुक्त (जॉइंट) डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन पहले की तरह वैकल्पिक रहेगा। ऐसे खातों में नॉमिनी जोड़ने या बदलने के लिए सभी खाताधारकों की सहमति आवश्यक होगी।
नॉमिनी नहीं बनाना चाहते तो क्या करें?
यदि कोई निवेशक अपनी इच्छा से किसी को नॉमिनी नहीं बनाना चाहता, तो उसके लिए भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए संबंधित ब्रोकर, बैंक या म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर लॉग इन कर नॉमिनेशन सेक्शन में जाना होगा और निर्धारित घोषणा पत्र जमा कर ‘ऑप्ट-आउट’ विकल्प चुनना होगा।
जो निवेशक नॉमिनी जोड़ना चाहते हैं, वे अधिकतम तीन लोगों को नॉमिनी बना सकते हैं। साथ ही यह भी तय कर सकते हैं कि प्रत्येक नॉमिनी को निवेश का कितना प्रतिशत मिलेगा।
नॉमिनी नहीं होने पर किसे मिलेगी निवेश राशि?
यदि किसी निवेशक ने नॉमिनी दर्ज नहीं किया है और उसका निधन हो जाता है, तो उसकी निवेश संपत्ति सीधे नॉमिनी को नहीं बल्कि कानूनी उत्तराधिकारियों को सिक्योरिटीज ट्रांसमिशन प्रक्रिया के तहत हस्तांतरित की जाती है। इस प्रक्रिया में उत्तराधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं, जिसके बाद निवेश उनके नाम ट्रांसफर किया जाता है।
छोटे दावों के लिए आसान होगी प्रक्रिया
सेबी ने छोटे निवेश दावों के निपटारे को आसान बनाने के लिए ‘क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग’ व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत सीमित मूल्य वाले निवेशों के हस्तांतरण के लिए कम दस्तावेजों के साथ तेज प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार:
- फिजिकल होल्डिंग में 10,000 रुपये तक के दावे।
- डीमैट होल्डिंग में 30,000 रुपये तक के दावे।
इन दोनों श्रेणियों में ट्रांसफर की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज होगी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
सेबी का मानना है कि बड़ी संख्या में निवेशक नॉमिनेशन की जानकारी दर्ज नहीं करते, जिससे उनके निधन के बाद परिवार को निवेश राशि प्राप्त करने में लंबी कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। नए नियमों से निवेशकों को समय रहते नॉमिनेशन या ऑप्ट-आउट का स्पष्ट विकल्प चुनना होगा, जिससे भविष्य में उत्तराधिकार से जुड़े विवाद और देरी कम हो सकेगी।

