नई दिल्ली/चेन्नई: लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार और वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच द्रमुक (डीएमके) के रुख में बदलाव की चर्चा ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार परिसीमन प्रक्रिया के दौरान तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ने की लिखित गारंटी देती है, तो पार्टी इस विषय पर आगे बातचीत के लिए तैयार हो सकती है।
दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर जताई चिंता
पार्टी का कहना है कि परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ असमान व्यवहार नहीं होना चाहिए। डीएमके की मांग है कि प्रस्तावित विधेयक में ही प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी तरह के क्षेत्रीय असंतुलन या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
सरकार संशोधन पर कर सकती है विचार
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की आशंकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार विधेयक के मसौदे में कुछ बदलावों पर विचार कर सकती है। चर्चा है कि राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर एक स्पष्ट आश्वासन भी दस्तावेज का हिस्सा बनाया जा सकता है, जिससे विभिन्न दलों की चिंताओं का समाधान हो सके।हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
परिसीमन को लेकर पहले कर चुका है विरोध
डीएमके ने पहले भी परिसीमन के मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। पार्टी का तर्क रहा है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया गया तो दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इसी कारण पार्टी लंबे समय से इस विषय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराती रही है।
कांग्रेस पर भी जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, डीएमके के भीतर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी असंतोष है। पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि कई मुद्दों पर कांग्रेस के फैसलों से विपक्षी गठबंधन को नुकसान हुआ है।बताया जा रहा है कि डीएमके अब राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अपने राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लेने के पक्ष में है और किसी अन्य सहयोगी दल के रुख का इंतजार नहीं करना चाहती।
आधिकारिक स्थिति का इंतजार
हालांकि, विधेयक के अंतिम स्वरूप, संभावित संशोधनों और विभिन्न दलों के आधिकारिक रुख को लेकर अभी स्पष्टता आना बाकी है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और राजनीतिक दलों की औपचारिक प्रतिक्रियाओं के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

