गुजरात : भरूच की रहने वाली 45 वर्षीय जिगीषा टेलर की कहानी यह साबित करती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। करीब 16 वर्षों तक इलेक्ट्रॉनिक्स विषय की अध्यापक रहीं जिगीषा ने वर्ष 2019 में पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अपनी नौकरी छोड़ दी थी। कुछ समय बाद उनके बेटे आदित्य ने आईआईटी मद्रास के ऑनलाइन बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशन कार्यक्रम में प्रवेश लिया। बेटे को नियमित पढ़ाई करते देखकर जिगीषा के मन में भी दोबारा पढ़ाई शुरू करने का विचार आया और वर्ष 2022 के आखिर में उन्होंने भी उसी कार्यक्रम में दाखिला ले लिया।
किचन की टेबल बनी पढ़ाई का केंद्र
घर में मां और बेटे की पढ़ाई का सबसे खास स्थान किचन की टेबल बन गई। दोनों साथ बैठकर पढ़ाई करते, असाइनमेंट तैयार करते और परीक्षाओं की तैयारी में एक-दूसरे का सहयोग करते थे। यही माहौल दोनों के लिए लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा भी बन गया।
सुबह साढ़े चार बजे से शुरू होती थी पढ़ाई
लंबे अंतराल के बाद गणित और सांख्यिकी जैसे विषयों की पढ़ाई दोबारा शुरू करना जिगीषा के लिए आसान नहीं था। उन्होंने अपने दिन की शुरुआत सुबह 4 बजकर 30 मिनट से करनी शुरू की और करीब 7 बजे तक पढ़ाई करती थीं। इसके बाद वह घर की जिम्मेदारियां निभाती थीं। उम्र के इस पड़ाव पर पढ़ाई शुरू करने के फैसले पर कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए, लेकिन उनके प्रोफेसर पति और परिवार ने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया।
मां और बेटे के बीच बनी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
एक ही संस्थान में पढ़ाई करने के दौरान मां और बेटा केवल सहपाठी ही नहीं रहे, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी दोनों के बीच देखने को मिली। दोनों की कोशिश रहती थी कि परीक्षाओं में बेहतर ग्रेड हासिल करें। यही सकारात्मक प्रतिस्पर्धा उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करती रही।
दीक्षांत समारोह में साथ मिला सम्मान
आदित्य ने वर्ष 2024 में अपनी बीएस डिग्री पूरी करने के बाद डेटा साइंस इंजीनियर के रूप में सिंजेन्टा में नौकरी हासिल कर ली। इसी दौरान जिगीषा ने भी अपना डिप्लोमा सफलतापूर्वक पूरा किया। दीक्षांत समारोह में दोनों अलग-अलग सेक्शन में बैठे थे, क्योंकि उनके कार्यक्रम अलग थे। बाद में एक सहपाठी के सुझाव पर संस्थान ने मां और बेटे को एक साथ मंच पर बुलाकर डिग्री प्रदान की। जिगीषा ने इस पल को अपने जीवन का सबसे यादगार और भावुक अनुभव बताया।

