नई दिल्ली। तेज बुखार शरीर का संकेत होता है कि वह किसी संक्रमण या अन्य समस्या से लड़ रहा है। हालांकि कई मामलों में आराम, पर्याप्त पानी और उचित इलाज से बुखार ठीक हो जाता है, लेकिन लंबे समय तक तेज बुखार बने रहने या गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है। आयुर्वेद में भी बुखार के दौरान कुछ पारंपरिक घरेलू उपायों का उल्लेख मिलता है, जो सामान्य स्थिति में राहत पहुंचाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि किसी भी उपाय को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
तेज बुखार किन कारणों से हो सकता है?
बुखार के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें वायरल संक्रमण, फ्लू, डेंगू, बैक्टीरियल संक्रमण, निमोनिया, यूरिन संक्रमण, हीट स्ट्रोक, सूजन संबंधी बीमारियां और कुछ मामलों में गंभीर रोग भी शामिल हैं। बुखार के साथ ठंड लगना, शरीर दर्द, कमजोरी, पसीना आना, भूख कम लगना और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, भ्रम की स्थिति या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो रही हो तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
राहत देने वाले पारंपरिक घरेलू उपाय
आयुर्वेद में कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताए गए हैं जिन्हें सामान्य बुखार के दौरान सहायक माना जाता है।
- तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में मददगार माना जाता है।
- अदरक और शहद का मिश्रण गले की तकलीफ और सूजन कम करने में सहायक हो सकता है।
- मेथी के बीज का पानी शरीर में पानी की कमी दूर करने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है।
- कुछ पारंपरिक मान्यताओं में लौकी के टुकड़ों का उपयोग भी बताया जाता है, लेकिन इसके प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें
आचार्य बालकृष्ण ने बुखार में कुछ आयुर्वेदिक औषधियों का भी उल्लेख किया है। हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक, हर्बल या एलोपैथिक दवा का सेवन स्वयं करने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है, खासकर यदि बुखार तेज हो, कई दिनों तक बना रहे या किसी गंभीर बीमारी की आशंका हो।
बुखार में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
बुखार के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें, हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें, पर्याप्त आराम करें और शरीर का तापमान समय-समय पर जांचते रहें। यदि बुखार 102–104 डिग्री फ़ारेनहाइट तक पहुंच जाए, बार-बार लौटे या दवाओं के बावजूद कम न हो तो तुरंत अस्पताल जाकर जांच कराना चाहिए।

