ग्रीन पटाखों के लिए दिल्ली कितनी तैयार? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बढ़ी बहस, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

नई दिल्ली: दिवाली के करीब आते ही दिल्ली में ग्रीन पटाखों को लेकर तैयारियों और बहसों ने जोर पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में सुरक्षित और पर्यावरण-मित्र पटाखों के उपयोग पर जोर दिया गया है, जिससे नागरिकों और उद्योग दोनों के लिए नई चुनौतियां सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन पटाखों का उत्पादन और वितरण बढ़ाने के लिए सख्त नियमों का पालन आवश्यक है। प्रोफेसर अनुराग वर्मा का कहना है, “ग्रीन पटाखे कम धुआँ और कम ध्वनि पैदा करते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी निरीक्षण और प्रमाणपत्र अनिवार्य हैं।”

दिल्ली सरकार ने भी इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। राजधानी में ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए अलग मार्केटिंग और लाइसेंसिंग नियम लागू किए गए हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित और पर्यावरण-मित्र विकल्प आसानी से मिल सकें।

हालांकि, उद्योग जगत कुछ हद तक चिंतित है। पटाखा निर्माताओं का कहना है कि परंपरागत पटाखों से ग्रीन पटाखों की कीमत अधिक होने से मांग प्रभावित हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक रूप से यह कदम पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञों की राय के बाद अब सवाल यह है कि दिल्लीवासियों की दिवाली इस साल कितनी हरी और सुरक्षित होगी। इस दिशा में सरकार, उद्योग और नागरिकों की भागीदारी अहम साबित होगी।

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