नई दिल्ली। सिरदर्द आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। बड़ी संख्या में लोग सिर में भारीपन, दर्द या आंखों के आसपास परेशानी महसूस करते हैं। कभी-कभार होने वाला सिरदर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार या रोजाना होने लगे तो इसके कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।
कई बार सिरदर्द के पीछे कोई बड़ी बीमारी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं। जीवनशैली में छोटे बदलाव करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
हर सिरदर्द का अनुभव अलग हो सकता है
सिरदर्द हर व्यक्ति में अलग-अलग रूप में दिखाई देता है। कुछ लोगों को सिर में दबाव या भारीपन महसूस होता है, जबकि कुछ लोगों को तेज धड़कन जैसा दर्द परेशान करता है।
कई बार आंखों के पीछे दर्द या चुभन भी महसूस हो सकती है। वहीं माइग्रेन से पीड़ित लोगों में सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होना आम है। इसके साथ उल्टी जैसा महसूस होना और तेज रोशनी या आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
समय पर भोजन नहीं करना बढ़ा सकता है परेशानी
व्यस्त दिनचर्या के कारण कई लोग खाना छोड़ देते हैं या लंबे समय तक खाली पेट रहते हैं। यह आदत शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है, जिससे सिरदर्द शुरू हो सकता है। माइग्रेन से परेशान लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर को लगातार ऊर्जा देने के लिए समय पर पौष्टिक भोजन करना जरूरी है और लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए।
पानी की कमी भी बन सकती है सिरदर्द की वजह
शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द का एक प्रमुख कारण हो सकता है। कई लोग काम में व्यस्त रहने के कारण पर्याप्त पानी नहीं पीते।
शुरुआत में इसका असर महसूस नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे थकान, कमजोरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनानी चाहिए।
नींद का बिगड़ा हुआ रूटीन डाल सकता है असर
स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी है। कम नींद लेने से शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता, जिससे सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है।
वहीं जरूरत से ज्यादा सोना भी कई बार सिरदर्द का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना करीब सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए।
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों पर दबाव बढ़ता है।
तनाव और मानसिक थकान भी बढ़ा सकते हैं दर्द
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव सिरदर्द की बड़ी वजह बन गया है। काम का दबाव, चिंता और मानसिक थकान के कारण सिर में भारीपन महसूस हो सकता है।
लगातार तनाव में रहने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है, जिससे सिरदर्द की समस्या परेशान कर सकती है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान, हल्की एक्सरसाइज और पर्याप्त आराम फायदेमंद हो सकते हैं।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर पड़ता है दबाव
मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का लंबे समय तक इस्तेमाल भी सिरदर्द को बढ़ा सकता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर जोर पड़ता है और आंखों की थकान सिरदर्द का कारण बन सकती है।
स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना चाहिए। साथ ही सही रोशनी में काम करना और स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखना जरूरी है।
लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से लें सलाह
अगर सिरदर्द रोजाना हो रहा है, दर्द बहुत तेज है, अचानक शुरू हुआ है या इसके साथ चक्कर, उल्टी, कमजोरी जैसी समस्याएं भी दिखाई देती हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सही समय पर ध्यान देकर और जीवनशैली में सुधार करके सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

