हमारे शरीर का लीवर सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है, जो लगातार बिना रुके कई जरूरी काम करता रहता है। यह शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने, ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने और कई जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है।
लेकिन आज भी बहुत से लोग लीवर की सेहत को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरतते। अक्सर किसी गंभीर समस्या के सामने आने के बाद ही लोग लीवर से जुड़ी बीमारियों पर ध्यान देते हैं। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है हेपेटाइटिस, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
क्या है हेपेटाइटिस, क्यों बढ़ जाता है खतरा
हेपेटाइटिस लीवर में होने वाली सूजन की स्थिति है। यह मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के कारण होता है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
हेपेटाइटिस वायरस को मुख्य रूप से पांच प्रकारों में बांटा गया है:
- हेपेटाइटिस ए
- हेपेटाइटिस बी
- हेपेटाइटिस सी
- हेपेटाइटिस डी
- हेपेटाइटिस ई
हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर दूषित भोजन और पानी के कारण फैलते हैं। वहीं हेपेटाइटिस बी, सी और डी ज्यादा गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रहकर लीवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर लंबे समय तक संक्रमण बना रहे तो लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस क्यों मनाया जाता है
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करना और इलाज के महत्व को समझाना है।
यह दिन हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज करने वाले वैज्ञानिक डॉ. बारूक सैम्युअल ब्लमबर्ग के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। उन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी और इस उपलब्धि के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
इस दिन का संदेश साफ है कि सही जानकारी, समय पर जांच और उचित इलाज से हेपेटाइटिस के गंभीर परिणामों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
शुरुआत में दिख सकते हैं ये सामान्य लक्षण
हेपेटाइटिस के शुरुआती संकेत कई बार बहुत हल्के होते हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
लगातार थकान और कमजोरी
बिना ज्यादा मेहनत किए भी लगातार थकान महसूस होना, शरीर में ऊर्जा की कमी रहना और कमजोरी महसूस होना हेपेटाइटिस का संकेत हो सकता है।
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
जब शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है तो आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है। इसे पीलिया का प्रमुख लक्षण माना जाता है।
भूख कम लगना और पेट में परेशानी
हेपेटाइटिस होने पर भूख में कमी, पेट में दर्द या भारीपन, उल्टी और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पेशाब का रंग गहरा होना और वजन घटना
गहरे रंग का पेशाब, अचानक वजन कम होना और शरीर में कमजोरी महसूस होना भी लीवर से जुड़ी समस्या की ओर संकेत कर सकता है।
कुछ लोगों में जोड़ों में दर्द और हल्का बुखार भी देखा जा सकता है।
हेपेटाइटिस से बचाव के आसान तरीके
हेपेटाइटिस से बचने के लिए सावधानी और साफ-सफाई सबसे जरूरी है।
- हमेशा साफ और सुरक्षित पानी का सेवन करें।
- भोजन करने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं।
- हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीन लगवाएं।
- संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क से बचें।
- इस्तेमाल की हुई सुई या इंजेक्शन का दोबारा उपयोग न करें।
- टैटू और पियर्सिंग करवाते समय साफ और सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव जरूरी हैं।
- शराब से दूरी बनाएं।
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाएं।
- शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें।
समय पर जांच और जागरूकता से बच सकता है लीवर
हेपेटाइटिस ऐसी बीमारी है जिसे सही समय पर पहचान लिया जाए तो इलाज और सावधानी के जरिए इसके गंभीर प्रभावों से बचा जा सकता है। लगातार थकान, त्वचा का पीला होना, भूख में कमी या पेट से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

