धीमा सिस्टम हमेशा पुराने हार्डवेयर का संकेत नहीं होता, कई बार बैकग्राउंड ऐप्स, भरी स्टोरेज और ज्यादा ब्राउजर टैब ही लैपटॉप की रफ्तार कम कर देते हैं
अगर आपका लैपटॉप पहले की तरह तेजी से काम नहीं कर रहा है, फाइल खोलने में समय लग रहा है या ऐप्स बार-बार अटक रहे हैं, तो तुरंत नया RAM या महंगा हार्डवेयर खरीदने की जरूरत नहीं है। कई बार सिस्टम की कुछ सामान्य आदतों और सेटिंग्स के कारण परफॉर्मेंस प्रभावित होती है।
थोडी सी सफाई और सही तरीके से सिस्टम मैनेज करने पर लैपटॉप की गति में सुधार किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि आप कोई पैसा खर्च करें।
सबसे पहले लैपटॉप को रीस्टार्ट करें, कई दिनों से चालू सिस्टम को मिल सकता है राहत का मौका
अगर आपका लैपटॉप कई दिनों से लगातार स्लीप या ऑन स्थिति में चल रहा है, तो उसे एक बार पूरी तरह रीस्टार्ट करना उपयोगी हो सकता है। लंबे समय तक सिस्टम चलने के दौरान कई अस्थायी प्रक्रियाएं और बैकग्राउंड टास्क सक्रिय रह सकते हैं।
रीस्टार्ट करने से ऐसी प्रक्रियाएं समाप्त होती हैं और सिस्टम को नए सिरे से काम शुरू करने का मौका मिलता है। इसलिए लैपटॉप धीमा महसूस होने पर सबसे पहले यह आसान उपाय जरूर आजमाएं।
लैपटॉप ऑन होते ही चलने वाले गैरजरूरी ऐप्स बंद करें, बूटिंग और RAM दोनों पर पडता है असर
कई प्रोग्राम कंप्यूटर शुरू होते ही अपने आप लॉन्च हो जाते हैं। इनमें से सभी ऐप्स हर समय जरूरी नहीं होते। लगातार सक्रिय रहने वाले ऐसे प्रोग्राम सिस्टम के संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं और लैपटॉप के स्टार्ट होने में भी ज्यादा समय लग सकता है।
Windows में Ctrl + Shift + Esc दबाकर Task Manager खोलें। इसके बाद Startup से जुडे विकल्प में जाकर उन ऐप्स को Disable किया जा सकता है जिनकी आपको हर बार जरूरत नहीं होती।
हालांकि किसी सिस्टम या सुरक्षा से जुडे महत्वपूर्ण प्रोग्राम को बंद करने से पहले उसकी भूमिका जरूर समझ लें।
कौन सा ऐप CPU और RAM खा रहा है, Task Manager से तुरंत पता लगाएं
लैपटॉप अचानक धीमा होने लगे तो यह देखना भी जरूरी है कि इसके पीछे कौन सा प्रोग्राम ज्यादा संसाधन इस्तेमाल कर रहा है। Windows में Task Manager और Mac में Activity Monitor इस काम में मदद करते हैं।
अगर कोई ऐप सामान्य काम के मुकाबले असामान्य रूप से ज्यादा CPU या मेमोरी इस्तेमाल कर रहा है और उस समय उसकी जरूरत नहीं है, तो उसे बंद किया जा सकता है। इससे दूसरे जरूरी कामों के लिए सिस्टम संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
ब्राउजर में दर्जनों टैब खुले हैं तो उन्हें कम करें, RAM पर सीधा असर पड सकता है
एक साथ बहुत सारे Chrome, Edge या अन्य ब्राउजर टैब खुले रहने से सिस्टम की मेमोरी पर अतिरिक्त दबाव पड सकता है। खासकर ऐसे पेज जिनमें वीडियो, ऑनलाइन एडिटर, सोशल मीडिया फीड या अन्य इंटरैक्टिव कंटेंट चल रहा हो, वे ज्यादा संसाधन इस्तेमाल कर सकते हैं।
काम पूरा होने के बाद गैरजरूरी टैब बंद करें। जिन वेबसाइटों की तुरंत जरूरत नहीं है, उन्हें खुला छोडने के बजाय बाद में दोबारा खोला जा सकता है।
स्टोरेज में जगह खाली रखें, क्योंकि बहुत कम खाली स्पेस से सिस्टम की रफ्तार प्रभावित हो सकती है
लैपटॉप की स्टोरेज लगभग पूरी भर जाने पर सिस्टम के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है। ऑपरेटिंग सिस्टम को अस्थायी फाइलों और कुछ वर्चुअल मेमोरी गतिविधियों के लिए खाली जगह की जरूरत पड सकती है।
इसलिए पुराने डाउनलोड, अनावश्यक इंस्टॉलर, अस्थायी फाइलें और ऐसी सामग्री जिसे अब इस्तेमाल नहीं करना है, समय-समय पर हटाते रहें। इससे डिस्क पर पर्याप्त खाली स्थान बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एक साथ बहुत सारे ऐप्स चलाने की आदत बदलें, जरूरत के हिसाब से ही प्रोग्राम खुले रखें
यदि लैपटॉप पर एक साथ कई भारी ऐप्स, ब्राउजर, वीडियो प्लेयर और दूसरे प्रोग्राम चल रहे हैं, तो सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड सकता है। काम पूरा होने के बाद इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स बंद करना बेहतर है।
खासकर कम RAM वाले लैपटॉप में यह बदलाव रोजमर्रा के काम के दौरान फर्क महसूस करा सकता है।
नया हार्डवेयर खरीदने से पहले ये छोटी आदतें अपनाएं, हो सकता है समस्या बिना खर्च के हल हो जाए
धीमा लैपटॉप हमेशा खराब हार्डवेयर का संकेत नहीं होता। कई मामलों में अनावश्यक स्टार्टअप प्रोग्राम, अत्यधिक ब्राउजर टैब, बैकग्राउंड प्रक्रियाएं और लगभग भरी हुई स्टोरेज ही सिस्टम की गति प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए नया RAM या दूसरा हार्डवेयर खरीदने से पहले इन बुनियादी उपायों को आजमाना समझदारी होगी। अगर इसके बाद भी लैपटॉप लगातार धीमा रहता है, तब हार्डवेयर की स्थिति और सिस्टम की दूसरी संभावित समस्याओं की जांच करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

