मुंबई : जुहू में खुला ‘जानू बाय ब्लॉन्डी’ यह साबित करने की कोशिश करता है कि शाकाहारी कैफे केवल सीमित विकल्पों तक ही नहीं होते। यहां का उद्देश्य ऐसा अनुभव देना है, जहां मेहमान खाने को केवल शाकाहारी होने के नजरिए से नहीं बल्कि उसके स्वाद, प्रस्तुति और यादों से जुड़ाव के आधार पर महसूस करें।
बैस्टियन हॉस्पिटैलिटी के इस नए कैफे की शुरुआत 15 जुलाई को हुई। इसके पीछे अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा और रेस्टोरेंट उद्यमी रंजीत बिंद्रा का नाम जुड़ा है। खार स्थित ब्लॉन्डी के सिस्टर कैफे के रूप में तैयार किया गया जानू भारतीय कम्फर्ट फूड को आधुनिक रूप में पेश करता है।
रंगों और भारतीय संस्कृति से सजा माहौल
कैफे में प्रवेश करते ही सबसे पहले इसकी जीवंत ऊर्जा आकर्षित करती है। जानू का सिग्नेचर नीला रंग इंटीरियर में प्रमुखता से नजर आता है। भारतीय लोककथाओं से प्रेरित रंगीन म्यूरल, विंटेज सजावट, आकर्षक कलाकृतियां और आरामदायक बैठने की व्यवस्था इसे खास बनाती है।
यह जगह जरूरत से ज्यादा सजावटी या बनावटी नहीं लगती, बल्कि एक ऐसे घर जैसा एहसास देती है जहां आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है।
कैफे का संगीत भी इसके माहौल को और बेहतर बनाता है। 90 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों के बॉलीवुड गीत धीमी आवाज में चलते रहते हैं, जो बातचीत में बाधा डाले बिना पुराने दिनों की यादों को ताजा कर देते हैं।
पूरे भारत के स्वाद को एक मेन्यू में समेटने की कोशिश
हेड शेफ परवीन सिंह रावत के अनुसार, जानू का मेन्यू किसी ट्रेंड या एक खास शैली के खाने पर आधारित नहीं है। इसकी प्रेरणा लोगों की उन पसंदीदा डिशों से ली गई है, जिनसे उनकी भावनात्मक यादें जुड़ी होती हैं।
उनका कहना है कि भारत के हर हिस्से में ऐसी कई डिश हैं, जिन्हें लोग हमेशा खाना पसंद करते हैं। इसी सोच के साथ मेन्यू में दिल्ली की चाट, दक्षिण भारतीय व्यंजन और बंगाली मिठाइयों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के स्वाद शामिल किए गए हैं।
शाकाहारी भोजन को बनाया रचनात्मक चुनौती
शेफ रावत के अनुसार, पूरे मेन्यू को शाकाहारी रखना किसी सीमा की तरह नहीं बल्कि एक रचनात्मक अवसर था। भारतीय भोजन परंपरा में पहले से ही कई बेहतरीन शाकाहारी व्यंजन मौजूद हैं।
जानू की कोशिश है कि बिना मांस के भी खाने में गहराई, अलग-अलग टेक्सचर और भरपूर स्वाद दिया जाए। अगर ग्राहक यह भूल जाए कि खाना शाकाहारी है और केवल उसके स्वाद की तारीफ करे, तो यही इस कैफे की सबसे बड़ी सफलता होगी।
इलाहाबादी समोसा चाट ने जीता दिल
मेन्यू की शुरुआत चाट से करना एक अच्छा विकल्प साबित होता है। इलाहाबादी समोसा चाट में कुरकुरा समोसा, मसालेदार छोले, मीठा दही, पुदीने की चटनी, सोंठ और अनार के दाने मिलकर पारंपरिक स्वाद को बनाए रखते हैं।
इसमें तीखे, मीठे और खट्टे स्वाद का संतुलन शानदार है। खास बात यह है कि इसमें अनावश्यक प्रयोग नहीं किए गए हैं, जिससे इसका मूल स्वाद बरकरार रहता है।
लेबनीज फतह का हल्का और संतुलित स्वाद
लेबनीज फतह एक अलग अनुभव देता है। कुरकुरी पीटा ब्रेड के साथ गार्लिक योगर्ट, अचार, पुदीना, ऑलिव ऑयल और अनार के दाने इसे क्रीमी, ताजा और हल्का स्वाद देते हैं।
हालांकि यह मेन्यू की सबसे यादगार डिश नहीं लगती, लेकिन संतुलित स्वाद के कारण इसे एक अच्छा स्टार्टर कहा जा सकता है।
राम लड्डू में दिखी सुधार की गुंजाइश
राम लड्डू इस मेन्यू की वह डिश रही जो उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई। पीली मूंग दाल से बने पकौड़ों के साथ हरी चटनी और मूली का स्वाद तो अच्छा है, लेकिन इसकी बनावट थोड़ी ज्यादा मुलायम महसूस होती है।
यदि इसमें साबुत मूंग दाल का इस्तेमाल थोड़ा बढ़ाया जाए, तो इसमें जरूरी कुरकुरापन और बेहतर टेक्सचर आ सकता है।
एवोकाडो बेन्ने डोसा बना सबसे अलग विकल्प
जानू की सबसे अनोखी डिश में एवोकाडो बेन्ने डोसा शामिल है। पारंपरिक बेन्ने डोसा में एवोकाडो का प्रयोग सुनने में अलग लग सकता है, लेकिन स्वाद के स्तर पर यह प्रयोग सफल साबित होता है।
एवोकाडो डोसे के स्वाद को भारी नहीं बनाता, बल्कि उसमें क्रीमी टेक्सचर जोड़ता है। प्याज-टमाटर मसाला और सिरके वाले प्याज इसके भारतीय स्वाद को बनाए रखते हैं। सफेद मक्खन और नारियल, टमाटर व मूंगफली की चटनी के साथ परोसा गया यह डोसा मेन्यू की सबसे अलग पेशकशों में शामिल है।

