बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार को केंद्र से लंबित राशि में से 406 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह भुगतान गुरुवार को नई दिल्ली में कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद और केंद्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के बीच हुई बैठक के बाद सामने आया।
मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद रिजवान अरशद का यह पहला दिल्ली दौरा था। बैठक में राज्य के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग से जुड़े वित्तीय मामलों के साथ लंबित भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
बैठक में उठाया बकाये का मुद्दा, 406 करोड़ रुपये हुए जारी
कर्नाटक सरकार की ओर से केंद्र के पास लंबित अलग अलग मदों की राशि का विवरण बैठक में रखा गया। इसके बाद केंद्र की ओर से 406 करोड़ रुपये जारी किए गए। रिजवान अरशद ने राशि जारी होने पर केंद्र सरकार का आभार जताया।
राज्य सरकार के अनुसार, विभिन्न मदों में अभी करीब 2,200 करोड़ रुपये और मिलना बाकी है। इस हिसाब से 406 करोड़ रुपये जारी होने के बाद लगभग 1,800 करोड़ रुपये की राशि लंबित रह गई है।
बाकी भुगतान जल्द मिलने की राज्य सरकार को उम्मीद
रिजवान अरशद ने उम्मीद जताई कि लंबित शेष राशि भी आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से जारी की जाएगी। राज्य सरकार के लिए यह राशि खाद्य और सार्वजनिक वितरण से जुड़े वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, जारी किए गए 406 करोड़ रुपये किन विशेष मदों में खर्च किए जाएंगे, इसका विस्तृत विवरण तत्काल उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
PDS में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक पर जोर
बैठक में केवल वित्तीय मामलों पर ही चर्चा नहीं हुई। कर्नाटक की सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS में किए जा रहे सुधारों की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी गई।
राज्य सरकार के मुताबिक, खाद्यान्न रखने वाले गोदामों में निगरानी मजबूत करने के लिए CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं राशन और खाद्यान्न की ढुलाई करने वाले वाहनों की GPS के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है।
इन तकनीकी उपायों का उद्देश्य खाद्यान्न की आवाजाही पर नजर रखना और वितरण व्यवस्था में संभावित गड़बड़ियों को कम करना है।
राशन कार्ड और ई KYC व्यवस्था पर भी चल रहा काम
कर्नाटक में राशन कार्ड से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से ई KYC प्रक्रिया और तकनीकी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा की जा चुकी है।
सरकार का फोकस राशन कार्ड से संबंधित सेवाओं को अधिक सुचारू बनाने और लाभार्थियों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सुविधाएं बेहतर तरीके से पहुंचाने पर है।
केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय मुद्दों पर जारी है संवाद
कर्नाटक में केंद्र से मिलने वाली राशि को लेकर राजनीतिक बहस पहले भी होती रही है। राज्य की कांग्रेस सरकार अलग अलग मौकों पर केंद्रीय फंड जारी करने में देरी का मुद्दा उठाती रही है। दूसरी ओर विभिन्न योजनाओं और मदों में राशि जारी करने की प्रक्रिया केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक स्तर पर चलती है।
फिलहाल 406 करोड़ रुपये जारी होने के बाद कर्नाटक को लंबित भुगतान का एक हिस्सा मिल गया है। अब राज्य सरकार की नजर करीब 1,800 करोड़ रुपये की शेष राशि पर है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि बाकी रकम कब और किन मदों के तहत जारी होती है।

