अगर रोज की सब्जी-रोटी से कुछ अलग और भरपेट खाना बनाने का मन है, तो मध्य प्रदेश और राजस्थान का पारंपरिक दाल बाफला एक शानदार विकल्प हो सकता है। घी में डूबे बाफले और मसालेदार दाल का मेल स्वाद को बिल्कुल अलग अंदाज देता है। देखने में यह बाटी जैसा जरूर लगता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि बाफले को पहले उबाला जाता है और फिर सेंककर तैयार किया जाता है।
बाफला बनाने के लिए चाहिए ये सामग्री
- गेहूं का आटा – 2 कप
- सूजी – 2 चम्मच
- अजवाइन – 1 चम्मच
- दही – 2 चम्मच
- घी – 3 से 4 चम्मच
- नमक – स्वादानुसार
- बेकिंग सोडा – थोड़ी मात्रा में
- पानी – जरूरत के अनुसार
दाल के लिए जरूरी सामग्री
- तुअर दाल – 1 कप
- प्याज – 1 बारीक कटा हुआ
- टमाटर – 2
- हरी मिर्च – 2
- अदरक-लहसुन का पेस्ट – 1 चम्मच
- जीरा, राई और हींग – तड़के के लिए
- हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर – स्वादानुसार
- घी – तड़के के लिए
- नमक – जरूरत के अनुसार
पहले तैयार करें नरम आटा
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा और सूजी लें। इसमें अजवाइन, नमक, दही, घी और थोड़ा बेकिंग सोडा डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथें। आटे को ढककर कुछ देर आराम करने दें।
इसके बाद आटे की समान आकार की लोइयां बनाकर उन्हें गोल कर लें।
बाफले को पहले उबालें, फिर करें सुनहरा
एक बड़े बर्तन में पानी गर्म करें और तैयार बाफलों को उसमें डालकर उबाल लें। जब वे अच्छी तरह पक जाएं तो उन्हें पानी से निकालकर थोड़ा ठंडा होने दें।
अब बाफलों को तंदूर, ओवन या गैस पर तब तक सेंकें, जब तक ऊपर से हल्का सुनहरा रंग न आ जाए। सेंकने के बाद इन्हें गरम घी में डुबो दें। यही प्रक्रिया बाफले को उसका खास देसी स्वाद और खुशबू देती है।
मसालेदार दाल के बिना अधूरा है दाल बाफला
तुअर दाल को धोकर कुकर में हल्दी और नमक के साथ पकाएं। दूसरी ओर कड़ाही में घी गर्म करें। इसमें जीरा, राई और हींग का तड़का लगाएं। फिर प्याज डालकर भूनें और इसके बाद टमाटर, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट तथा बाकी मसाले डालकर अच्छी तरह पकाएं।
जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए तो इसमें पकी हुई दाल डालें। जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर कुछ देर धीमी आंच पर पकाएं, ताकि दाल में मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए।
घी, दाल और चटनी के साथ करें परोसने की तैयारी
गरमा-गरम बाफले को प्लेट में रखें और ऊपर से थोड़ा घी डालें। इसके साथ मसालेदार दाल और अपनी पसंद की चटनी परोसें। चाहें तो खाने से ठीक पहले बाफले पर थोड़ा और घी डाल सकते हैं।
बाटी से अलग क्यों है दाल बाफला
दाल बाफला और बाटी देखने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन दोनों की तैयारी में अंतर है। बाफले को पहले उबालने और बाद में सेंकने की प्रक्रिया इसकी बनावट को खास बनाती है। घी और मसालों के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।
खास मौकों, त्योहारों या घर आए मेहमानों के लिए यह पारंपरिक व्यंजन बिना किसी सब्जी के भी पूरी थाली को खास बना सकता है।

