देश में माओवादियों के खिलाफ चल रही लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादी विरोधी अभियान पर बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष में सुरक्षा बलों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस दौरान 417 माओवादी एनकाउंटर में ढेर हुए, 2100 से ज्यादा ने आत्मसमर्पण किया और 1785 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। यह आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि माओवादी संगठन अब अपने अंतिम दौर में है और सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी जड़ों तक प्रहार किया है।
अमित शाह ने कहा कि अब सरकार की नीति स्पष्ट है — देश में माओवाद के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि आने वाले एक वर्ष के भीतर देश को माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा। शाह ने अपने बयान में कहा, “अब माओवाद इतिहास बनने जा रहा है, और इसका आखिरी अध्याय जल्द ही खत्म होगा।” गृह मंत्री के इस बयान ने साफ कर दिया है कि सरकार माओवाद को खत्म करने के मिशन मोड में है।
माओवादी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने इस बार अलग रणनीति अपनाई। जमीनी स्तर पर इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया, राज्य और केंद्र एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया और ड्रोन सर्विलांस जैसी नई तकनीक का उपयोग किया गया। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में इस रणनीति का बड़ा असर देखने को मिला, जहां माओवादियों के कई ठिकानों को ध्वस्त किया गया और उनके नेताओं को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस अभियान की सफलता में स्थानीय ग्रामीणों का भी बड़ा योगदान रहा। सुरक्षा बलों ने जनता का विश्वास जीतते हुए उन्हें विकास योजनाओं से जोड़ा, जिससे माओवादी विचारधारा का असर कम हुआ। कई पूर्व माओवादियों ने भी अब मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है और सरकार उन्हें पुनर्वास योजनाओं का लाभ दे रही है।
गृह मंत्रालय ने अब अपने अगले चरण की रणनीति तय की है। शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का अगला लक्ष्य विकास को गति देना और प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। जिन इलाकों में माओवादी प्रभाव घटा है, वहां तेजी से सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं ताकि लोग हिंसा के बजाय विकास की राह चुनें।
417 एनकाउंटर, 2100 सरेंडर और 1785 गिरफ्तारी के साथ सरकार का यह अभियान अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। अमित शाह के अल्टीमेटम के बाद यह स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में भारत माओवाद से पूरी तरह मुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है।