लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों की समस्याओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व लोगों को आंदोलन और विरोध के लिए उकसाकर अशांति का माहौल बनाते हैं, जबकि इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता।
हाल की घटनाओं का किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान मायावती ने मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, हरदोई समेत प्रदेश के कई जिलों में हुई हालिया घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन प्रभावित लोगों को संवैधानिक तरीके से न्याय दिलाने के बजाय उन्हें सड़क पर उतरने के लिए प्रेरित करते हैं।
‘हिंसा से नहीं, कानून से मिले न्याय’
मायावती ने आरोप लगाया कि पहले लोगों को प्रदर्शन, सड़क जाम और टकराव के लिए उकसाया जाता है, फिर राजनीतिक दलों के नेता घटनास्थल पर पहुंचकर सहानुभूति जताते हैं और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि उनकी समस्याएं और बढ़ जाती हैं।
बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख
बसपा प्रमुख ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अधिकारों की लड़ाई लड़ने का मार्ग दिखाया। उनके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को निचली अदालत से न्याय नहीं मिलता है, तो उसे उच्च न्यायालय या अन्य कानूनी मंचों का सहारा लेना चाहिए, न कि हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था का।
‘राजनीतिक ताकत ही सबसे बड़ा समाधान’
मायावती ने कहा कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के लिए सबसे प्रभावी रास्ता एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक शक्ति हासिल करना है। उन्होंने कहा कि यही बाबासाहेब अंबेडकर का संदेश था और बहुजन समाज पार्टी इसी विचारधारा पर लगातार काम करती रहेगी।

