नेतान्याहू ने भ्रष्टाचार के मुकदमे के बीच राष्ट्रपति से मांगी ‘क्षमादान’ — इज़राइल में सुर्खियों में राजनीतिक भूचाल

Benjamin Netanyahu — इज़राइल के प्रधानमंत्री — ने अपने खिलाफ चल रहे तीन पुराने भ्रष्टाचार मामलों की सुनवाई के बीच Isaac Herzog को औपचारिक रूप से ‘क्षमादान’ (pardon / clemency) का अनुरोध भेजा है। उनकी दलील है कि मुकदमा जारी रहने के कारण वह अपनी सरकार चला पाने में असहज हैं और देश की एकता तथा शासन-क्षमता के लिए यह कदम जरूरी है। उनकी ओर से राष्ट्रपति कार्यालय के कानूनी विभाग में दो कागजात भेजे गए — एक प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित पत्र, दूसरा उनके वकील का विस्तृत अनुरोध। हालांकि, इन दस्तावेज़ों में किसी भी आरोप की स्वीकृति या अपराध कबूलने का जिक्र नहीं है।

नेतन्याहू पर तीन मामलों में धोखाधड़ी, रिश्वत और विश्वास-घात के आरोप हैं। ये मामले 2019 में दर्ज किए गए थे और तब से वे कई सालों से सुनवाई का सामना कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है। हालाँकि, मुकदमे अभी तक खत्म नहीं हुए हैं — इसलिए उनका यह ‘पूर्व–न्यायाधिकरण क्षमादान’ (pre-conviction pardon) का अनुरोध एक असाधारण और विवादास्पद कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने इस अनुरोध को “असाधारण” (extraordinary) बताया है और कहा है कि वे कानून मंत्रालय और अन्य विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही इस पर फैसला करेंगे। विपक्षी दलों और कई नागरिकों ने इसे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि बिना दोष स्वीकार किए और न्यायालय प्रक्रिया पूरी हुए बिना माफी देना, “किसी के ऊपर कानून से बाहर” होने का संदेश देगा। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि ऐसा कदम इज़राइल को मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देगा।

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कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक तौर पर किसी दोषी ठहराए जाने के बाद ही क्षमादान देने का प्रावधान होता है। एक पूर्व–सुनवाई माफी (pre-conviction pardon) दुर्लभ और संवेदनशील मामला है। अगर राष्ट्रपति माफी दे देते हैं, तो यह इज़राइल के न्यायिक और राजनीतिक इतिहास में एक नया, विवादास्पद अध्याय होगा — विशेष रूप से यह देखते हुए कि आरोपों में मीडिया-स्वतंत्रता, भ्रष्टाचार, और शासन-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।दूसरी ओर, अगर माफी अस्वीकार हो जाती है या प्रक्रिया जारी रहती है, तो न्यायिक प्रक्रिया, विपक्ष और आम जनता के बीच राजनीतिक टकराव और गहराई ले सकता है।

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