नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानी CPCB को निर्देश दिया है कि वह बायोमेडिकल वेस्ट को जमीन में गहराई तक दबाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों के पालन पर एक नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे। यह कदम तब उठाया गया जब सामने आया कि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब भी तय पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
NGT की चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए CPCB से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर, 2026 को होगी।
CPCB रिपोर्ट में सामने आईं कई गंभीर कमियां
सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने 4 अगस्त, 2026 को CPCB की ओर से पेश की गई अनुपालन रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 स्थानों पर अब भी बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान के लिए डीप बरियल यानी जमीन में गहराई तक दबाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई हेल्थकेयर फैसिलिटीज बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत तय दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं।
9 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहा डीप बरियल का इस्तेमाल
CPCB की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 9,178 हेल्थकेयर फैसिलिटीज बायोमेडिकल वेस्ट को जमीन में दबाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रही हैं। इनमें से 5,715 संस्थान नियमों के अनुसार काम करते पाए गए, जबकि बाकी संस्थानों में नियमों की अनदेखी सामने आई।
जांच में कई तरह की कमियां दर्ज की गईं। इनमें बरियल पिट के नीचे पर्याप्त भूजल स्तर बनाए रखने में असफलता, निपटान स्थल के लिए जरूरी अनुमति का अभाव, रिकॉर्ड मेंटेन नहीं करना, रिहायशी इलाकों और जल स्रोतों के पास गड्ढे बनाना, निपटान प्रक्रिया की निगरानी में कमी और जानवरों की पहुंच रोकने में लापरवाही जैसी समस्याएं शामिल थीं।
120 हेल्थकेयर संस्थानों की जांच में ज्यादातर जगह मिली खामियां
CPCB ने डीप बरियल प्रक्रिया अपनाने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 120 हेल्थकेयर संस्थानों का निरीक्षण किया। इस जांच में केवल 16 संस्थान ही सभी तय मानकों पर खरे उतरे।
बाकी संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के अलग अलग प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। इससे साफ हुआ कि बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान को लेकर अभी भी कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
नियम नहीं माने गए तो CPCB करेगा कड़ी कार्रवाई
CPCB की ओर से पेश वकील ने NGT को बताया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों का उल्लंघन मिला है, वहां के स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।
CPCB ने कहा कि अगर आठ हफ्तों के भीतर संबंधित संस्थानों और अधिकारियों की ओर से सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत कार्रवाई के निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
NGT ने अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट जमा करने का दिया आदेश
ट्रिब्यूनल ने CPCB को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले नई अनुपालन रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश करे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निपटान स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में NGT की यह पहल नियमों के प्रभावी पालन और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

