मुंबई। बॉलीवुड ने देशभक्ति को पर्दे पर कई अलग-अलग अंदाज में पेश किया है। कभी सैनिकों के साहस के जरिए, कभी देश के लिए निजी रिश्तों और भावनाओं को पीछे छोड़ने वाली कहानियों के जरिए तो कभी खेल के मैदान में राष्ट्र की पहचान को सबसे ऊपर रखकर। इन फिल्मों के कई संवाद ऐसे हैं, जो वर्षों बाद भी दर्शकों को याद हैं।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आइए नजर डालते हैं उन चर्चित संवादों और दृश्यों पर, जिन्होंने सिनेमाघरों में तालियां बटोरीं और दर्शकों के भीतर देश के प्रति गर्व की भावना को और मजबूत किया।
उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक, जब पर्दे पर गूंजा नए भारत का तेवर
फिल्म उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना पर आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की पृष्ठभूमि तैयार होती है। इसी दौरान परेश रावल के किरदार का दमदार संवाद दर्शकों के बीच खूब चर्चित हुआ।
फिल्म में कहा जाता है कि अब हिंदुस्तान चुप नहीं बैठेगा और नया भारत दुश्मन के खिलाफ घर में घुसकर कार्रवाई करेगा। इस संवाद के बाद कहानी भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी और मिशन की ओर बढ़ती है।
परेश रावल ने फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गोविंद भारद्वाज की भूमिका निभाई थी। यह किरदार वास्तविक जीवन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित माना जाता है।
राजी, जब देश के सामने निजी रिश्ते भी पड़ गए छोटे
मेघना गुलजार की फिल्म राजी में आलिया भट्ट ने सहमत का किरदार निभाया था। फिल्म का एक संवाद उसके पूरे संघर्ष और देश के प्रति समर्पण को सामने रखता है।
सहमत कहती है कि देश से बढ़कर कुछ नहीं, खुद भी नहीं। फिल्म में उसका किरदार 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के एक सैन्य परिवार में शादी करके भारत के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाता है।
एक ओर उसके सामने रिश्ते और भावनाएं हैं तो दूसरी तरफ देश की जिम्मेदारी। इसी द्वंद्व के बीच यह संवाद कहानी को एक अलग भावनात्मक ऊंचाई देता है।
चक दे! इंडिया, जब अलग-अलग पहचान के बीच सबसे ऊपर आया भारत
शाहरुख खान की फिल्म चक दे! इंडिया का एक संवाद भारतीय खेल फिल्मों के सबसे यादगार संवादों में शामिल है। कबीर खान की भूमिका में शाहरुख महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों से कहते हैं कि उन्हें अलग-अलग राज्यों के नाम नहीं, सिर्फ एक देश दिखाई और सुनाई देता है।
फिल्म में टीम की खिलाड़ी देश के अलग-अलग हिस्सों से आती हैं और शुरुआत में क्षेत्रीय पहचान को लेकर बंटी रहती हैं। कबीर खान उन्हें समझाते हैं कि मैदान पर उनकी पहचान किसी राज्य से नहीं, बल्कि भारत से है।
गदर: एक प्रेम कथा, तारा सिंह के अंदाज में हिंदुस्तान पर गर्व
सनी देओल की फिल्म गदर: एक प्रेम कथा का तारा सिंह वाला किरदार देशभक्ति के संवादों के लिए आज भी याद किया जाता है। फिल्म में उनका यह कहना कि हिंदुस्तान पहले भी जिंदाबाद था, आज भी है और आगे भी रहेगा, दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।
फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद अपने परिवार को वापस लाने के लिए तारा सिंह के संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। देश के प्रति उसका गर्व और आक्रामक तेवर इस संवाद को खास बना देता है।
सैम बहादुर, एक लाइन में दिखी सैम मानेकशॉ की बेबाक भारतीय पहचान
विक्की कौशल अभिनीत सैम बहादुर में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का किरदार उनके खास अंदाज में देश से जुड़ी पहचान को सामने रखता है।
फिल्म में उनका संवाद है कि जन्म अमृतसर में हुआ, पत्नी मुंबई की हैं और काम दिल्ली में करता हूं, इससे ज्यादा भारतीय और क्या हो सकता है। संवाद में सैम मानेकशॉ के आत्मविश्वास, हास्य और सहज व्यक्तित्व की झलक मिलती है।
फिल्म उनके सैन्य जीवन और व्यक्तित्व पर केंद्रित है और विक्की कौशल ने इस किरदार को पर्दे पर खास अंदाज में पेश किया।
इन संवादों की खासियत सिर्फ शब्द नहीं, उनके पीछे छिपी कहानी है
देशभक्ति फिल्मों के ये संवाद इसलिए यादगार नहीं बने कि इनमें केवल देश का नाम लिया गया है। इनके पीछे सैनिकों का साहस, देश के लिए त्याग, राष्ट्रीय एकता और मुश्किल परिस्थितियों में अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देने की भावनाएं जुड़ी हैं।
यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर इन फिल्मों के संवाद एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में आ जाते हैं और पर्दे पर कही गई बातें दर्शकों के भीतर देश के प्रति गर्व और उत्साह की भावना को जगा देती हैं।

