संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई। बैठक का उद्देश्य आगामी सत्र के विधायी एजेंडे पर सभी दलों से चर्चा करना और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए सहयोग हासिल करना था, लेकिन बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध दर्ज कराया। इसी मुद्दे पर कई विपक्षी दलों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया।
बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्ष ने जताई आपत्ति
विपक्षी दलों का आरोप है कि शिवसेना (यूबीटी) और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में शामिल करना संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। नेताओं का कहना है कि जब इन सांसदों की स्थिति को लेकर विवाद बना हुआ है, तब उन्हें बैठक में आमंत्रित करना उचित नहीं है।
कांग्रेस और वाम दलों ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के हालिया फैसलों के विरोध में बैठक से बाहर निकलने का निर्णय लिया। वहीं, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे संसदीय परंपराओं और न्याय व्यवस्था का मजाक बताते हुए कहा कि विवादित स्थिति वाले सांसदों को सर्वदलीय बैठक में शामिल करना गलत संदेश देता है।
लोकसभा अध्यक्ष के फैसलों से शुरू हुआ विवाद
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दी थी। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति भी दी गई। इन फैसलों के बाद विपक्ष लगातार अपनी नाराजगी जता रहा है।
अरविंद सावंत ने अयोग्यता की मांग की
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को इस तरह मान्यता दी जाए। उन्होंने मांग की कि दल बदल करने वाले सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने भी उठाया सवाल
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब पार्टी की आधिकारिक संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो फिर बागी सांसदों को किस आधार पर सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया। उन्होंने इस फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की।
आप ने भी जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन. डी. गुप्ता ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी से जुड़े मामलों पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि अन्य दलों के बागी सांसदों को अलग पहचान और बैठक में जगह दी जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताया।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है और 13 अगस्त तक चलेगा। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं, जिससे आगामी दिनों में सदन के भीतर भी तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।

