नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में ऑस्ट्रेलिया का यह कदम पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भारत भी इस पहल से कई महत्वपूर्ण सीख ले रहा है।
ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया की पहल की प्रशंसा
मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में ऑस्ट्रेलिया द्वारा किए जा रहे बदलाव समाज की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने की दिशा में यह एक प्रभावी पहल है।
‘दुनिया के लिए प्रेरणादायी है यह मॉडल’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया जिस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बना रहा है, वह अन्य देशों के लिए भी उपयोगी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत इन प्रयासों का अध्ययन कर रहा है और उनसे कई महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर रहा है।
क्या है ऑस्ट्रेलिया का नया कानून
ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस कानून का उद्देश्य साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और सोशल मीडिया के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।
भारत में भी तेज हुई बहस
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नियम सख्त करने की मांग बढ़ रही है। कर्नाटक सरकार इस दिशा में पहल कर चुकी है, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार ने भी नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए संभावित कदमों के संकेत दिए हैं।
डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ रहा वैश्विक फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को देखते हुए दुनिया के कई देश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया का मॉडल वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

