नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया है। इस श्लोक के जरिए उन्होंने विचारों की शक्ति और मनुष्य के व्यवहार पर उसके प्रभाव का संदेश दिया। पीएम मोदी की ओर से साझा किए गए श्लोक में बताया गया है कि व्यक्ति जिस विषय पर लगातार विचार करता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी दिशा में झुकने लगता है।
प्रधानमंत्री ने लिखा,
यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः।
अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः।।
इसका भावार्थ है कि मनुष्य जिस विषय या वस्तु के बारे में बार-बार सोचता रहता है, अभ्यास के कारण उसका मन उसी ओर आकर्षित होने लगता है। इसलिए व्यक्ति को अपने चिंतन में सकारात्मक, शुभ और कल्याणकारी विचारों को स्थान देना चाहिए।
बार-बार किया गया चिंतन बनाता है मन की दिशा
इस सुभाषित का मूल संदेश यह है कि विचार केवल मन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लगातार किसी विषय पर ध्यान केंद्रित करने से मन की प्रवृत्ति भी उसी ओर बनने लगती है। ऐसे में सकारात्मक और अच्छे विचारों का चिंतन व्यक्ति के जीवन की दिशा को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
पिछले कुछ दिनों से सुभाषित साझा कर रहे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री इससे पहले भी लगातार संस्कृत के श्लोक और उनके अर्थ सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं। 28 अगस्त को उन्होंने रक्षा सूत्र से जुड़ा एक सुभाषित पोस्ट किया था।
एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर।
जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः।।
इसका अर्थ बताया गया था कि रक्षा सूत्र विजय, सुख, संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला माना गया है।
27 अगस्त को दिया था श्रेष्ठ कर्म का संदेश
27 अगस्त को पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक के माध्यम से परंपरा, ज्ञान और श्रेष्ठ आचरण का महत्व बताया था। संदेश में व्यक्ति को अपने ज्ञान और परंपराओं को आगे बढ़ाने, न्यायपूर्ण मार्ग अपनाने तथा श्रेष्ठ लोगों के सदाचार को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी गई थी।
26 अगस्त के सुभाषित में बताया था सद्भाव का महत्व
इससे एक दिन पहले 26 अगस्त को प्रधानमंत्री ने यह श्लोक साझा किया था,
ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्।
विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः।।
इसका भावार्थ था कि ज्ञानी और सज्जन लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सेवा और सद्भाव रखते हैं। वे व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर परस्पर सहयोग और प्रशंसा के जरिए जीवन में सुख और उन्नति प्राप्त करते हैं।
प्रधानमंत्री की इन लगातार पोस्ट में संस्कृत के प्राचीन ज्ञान को सरल अर्थ के साथ सामने रखा जा रहा है, जिससे उनके संदेश का केंद्र विचार, आचरण, सद्भाव और सकारात्मक जीवन दृष्टि पर बना हुआ है।

