Pranab Mukherjee Death Anniversary: पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी की पुण्यतिथि पर देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूर्व राष्ट्रपति को याद किया।नेताओं ने प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण, राजनीतिक अनुभव, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
नेताओं ने इस अंदाज में किया याद
पंकज चौधरी ने प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पूर्व राष्ट्रपति का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।योगी आदित्यनाथ ने उन्हें प्रख्यात राजनेता बताते हुए राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और लंबे सार्वजनिक जीवन को याद किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी प्रणब मुखर्जी की राष्ट्रसेवा, राजनीतिक अनुभव और लोकतंत्र के प्रति निष्ठा को स्मरण किया।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नीति निर्माण और राष्ट्रसेवा में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि प्रणब मुखर्जी की सार्वजनिक जीवन की विरासत और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
देश के 13वें राष्ट्रपति बने थे प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी ने 25 जुलाई 2012 को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। वह 25 जुलाई 2017 तक इस संवैधानिक पद पर रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और केंद्र सरकार में अलग-अलग मंत्रालयों का नेतृत्व किया।उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों तक सक्रिय रहा और उन्हें भारतीय राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिना जाता था।
राज्यसभा से लोकसभा तक लंबा राजनीतिक सफर
प्रणब मुखर्जी पहली बार 1969 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वह पांच बार राज्यसभा के सदस्य रहे। 2004 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता और 2009 में भी निचले सदन के लिए निर्वाचित हुए।कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्माण संस्था कांग्रेस कार्यकारी समिति में भी वह करीब 23 वर्षों तक सदस्य रहे। लंबे संसदीय अनुभव और विभिन्न संवैधानिक तथा राजनीतिक जिम्मेदारियों के कारण भारतीय राजनीति में उनकी अलग पहचान बनी।
2020 में हुआ था निधन
प्रणब मुखर्जी का निधन 31 अगस्त 2020 को हुआ था। उनके निधन के बाद देश के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को व्यापक रूप से याद किया गया। पुण्यतिथि पर एक बार फिर अलग-अलग दलों के नेताओं ने उनके राष्ट्रसेवा के लंबे सफर को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि दी।

