प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन विशेष रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना यानी भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश के लिए तैयार करना है।वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के जरिए भारत के रसायन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी की जा रही है।
पीएम मोदी ने बताया औद्योगिक विकास की दिशा में अहम कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भव्य-रसायन योजना देश के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।इस योजना के तहत ऐसे औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, साझा संसाधन और आधुनिक पर्यावरण सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। इससे उद्योगों को उत्पादन शुरू करने में आसानी होगी और लागत में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि इन पार्कों से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात क्षमता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
तीन पार्कों के लिए 3,030 करोड़ रुपये का बजट तय
भव्य-रसायन योजना के लिए सरकार ने कुल 3,030 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपये रासायनिक पार्कों की आंतरिक सुविधाओं और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किए जाएंगे।वहीं, 30 करोड़ रुपये योजना के प्रशासनिक कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल की अवधि में लागू की जाएगी।
राज्यों को मिलेगा केंद्र से बड़ा आर्थिक सहयोग
योजना के तहत रासायनिक पार्क विकसित करने के लिए राज्य सरकारों को भी अपनी भागीदारी निभानी होगी। प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य को कम से कम 500 करोड़ रुपये का योगदान करना होगा।
इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण मॉडल के आधार पर किया जाएगा।
रसायन उद्योग की पूरी सप्लाई चेन होगी मजबूत
सरकार के अनुसार, इन पार्कों से रसायन उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला को फायदा मिलेगा। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन, आपूर्ति व्यवस्था और सहायक उद्योगों को मजबूती मिलेगी।साझा सुविधाओं के विकास से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और परिवहन, प्रबंधन व उत्पादन लागत को कम करने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा मजबूती के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
निर्यात बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
भव्य-रसायन योजना का एक प्रमुख उद्देश्य भारत को रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।सरकार का लक्ष्य है कि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाए, विदेशी निवेश को आकर्षित किया जाए और भारतीय उद्योगों को वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ा जाए। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और जरूरी रासायनिक उत्पादों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
पर्यावरण सुरक्षा के साथ विकसित होंगे आधुनिक औद्योगिक केंद्र
रासायनिक उद्योग में पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन पार्कों में विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी।इनमें साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, खतरनाक कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था और भंडारण व निपटान से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। इससे उद्योगों को पर्यावरणीय नियमों का पालन करने में आसानी होगी और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि से इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का प्रभाव कई दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। सरकार के अनुसार, इन पार्कों के विकास से कृषि, कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को भी गति मिलेगी।इससे औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हर पार्क के लिए 2,000 एकड़ से ज्यादा जमीन होगी जरूरी
योजना के तहत बनाए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क के लिए कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर यानी लगभग 2,000 एकड़ का लगातार भूमि क्षेत्र उपलब्ध होना जरूरी होगा।इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुसार साझा बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि कंपनियों को एक ही स्थान पर आधुनिक सुविधाओं के साथ काम करने का बेहतर माहौल मिल सके।

