कटक। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा के कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन करते हुए उच्च शिक्षा की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे केंद्र होने चाहिए जहां युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा मिले और वे अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्राप्त करें।
ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत का किया उल्लेख
राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा वाला प्रदेश है। भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ने सदियों से समावेश, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह विरासत नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
कटक की ऐतिहासिक पहचान को सराहा
अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कटक अनेक महान विभूतियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है। उन्होंने उत्कल गौरव मधुसूदन दास, कर्मवीर गौरीशंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बीजू पटनायक, उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास और उत्कल केसरी डॉ. हरेकृष्ण महताब के योगदान को याद करते हुए कहा कि इस शहर ने देश को अनेक प्रेरणादायक व्यक्तित्व दिए हैं।
प्राचीन परंपरा और आधुनिक शिक्षा का होगा समन्वय
राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा संस्थान समाज और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।
युवाओं की क्षमता को निखारने पर दिया जोर
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। इस क्षमता का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब शिक्षण संस्थान ऐसा वातावरण तैयार करें जहां विद्यार्थियों की प्रतिभा, नवाचार और रचनात्मक सोच को विकसित होने का अवसर मिले।
मूल्य आधारित शिक्षा की बताई जरूरत
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों को ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करने चाहिए जो ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित हों। उनके अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज और मानवता के कल्याण में योगदान देना होना चाहिए।
विकसित भारत के लक्ष्य में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऐसे ज्ञान केंद्र बनने का आह्वान किया जहां शोध, नवाचार और नई तकनीकों के माध्यम से समाज की चुनौतियों का समाधान तैयार किया जा सके।
तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों का भी हो समावेश
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और नई तकनीकों को अपनाने के साथ नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार, उद्यमिता तथा विद्यार्थियों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर दिए जा रहे विशेष जोर की सराहना की।
‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ में योगदान की उम्मीद
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय भविष्य में ऐसे शोधकर्ता, उद्यमी और कुशल पेशेवर तैयार करेगा, जो विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

