प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने अच्छे चरित्र, सदाचार और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।
पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया श्लोक है:
शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः।
शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥
चरित्र को बताया सफलता का आधार
इस श्लोक का भावार्थ है कि सदाचारी व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता है और अच्छे लोग भी उसका आदर करते हैं। बेहतर चरित्र वाला इंसान अपनी ईमानदारी, विनम्रता और मर्यादित व्यवहार के कारण हर जिम्मेदारी निभाने योग्य माना जाता है।
संदेश में बताया गया कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके आचरण से होती है। मजबूत चरित्र ही सफलता, प्रभावी नेतृत्व और लोगों के भरोसे की सबसे बड़ी नींव होता है।
पहले भी पीएम मोदी साझा कर चुके हैं सुभाषित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी सोशल मीडिया पर संस्कृत के सुभाषित साझा करते रहे हैं। 24 जुलाई को उन्होंने एक अन्य श्लोक साझा किया था:
कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्॥
इसका अर्थ है कि व्यक्ति अपने कर्म, विचार और वाणी से जिस चीज का लगातार अभ्यास करता है, वही उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है। इसलिए हमेशा सकारात्मक और कल्याणकारी सोच को अपनाना चाहिए।
आत्मा और ब्रह्मांड के संबंध पर भी दिया था संदेश
23 जुलाई को प्रधानमंत्री ने एक और संस्कृत श्लोक साझा किया था, जिसमें ब्रह्मांड और आत्मा के बीच संबंध को समझाया गया था। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जो शक्ति पूरे ब्रह्मांड में मौजूद है, वही मनुष्य के भीतर भी विद्यमान है।
पीएम मोदी समय-समय पर संस्कृत श्लोकों के माध्यम से जीवन मूल्यों, सकारात्मक सोच और नैतिक आचरण से जुड़े संदेश साझा करते रहे हैं।

