भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया है। हाल ही में असम के ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में राफेल और स्वदेशी तेजस फाइटर जेट्स ने संयुक्त उड़ान भरकर न केवल देश की हवाई क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि पड़ोसी देशों को भी साफ संदेश दे दिया कि भारत हर मोर्चे पर तैयार है।
राफेल-तेजस की यह उड़ान एक रणनीतिक कवायद मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक्सरसाइज न सिर्फ भारत की वायुशक्ति को मजबूत बनाती है, बल्कि इससे यह भी साबित होता है कि स्वदेशी तकनीक (तेजस) अब राफेल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम है।
बांग्लादेश और पाकिस्तान के कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस एक्सरसाइज को लेकर व्यंग्यात्मक पोस्ट सामने आए हैं, लेकिन भारत में इसे आत्मनिर्भरता और सैन्य मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है। वहीं, चीन के रणनीतिक विश्लेषक इस कवायद को भारत की “नॉर्थईस्ट डिटरेंस पॉलिसी” से जोड़कर देख रहे हैं।