अगर आपके परिवार के सदस्य नौकरी, पढ़ाई या किसी दूसरे काम के कारण अलग-अलग शहरों में रहते हैं और परिवार सरकारी राशन का लाभ लेता है, तो One Nation One Ration Card यानी ONORC की सुविधा आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत परिवार के पात्र सदस्य एक ही राशन दुकान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी मौजूदा जगह के नजदीक किसी उचित मूल्य की दुकान से अपने हिस्से का राशन ले सकते हैं।
क्या परिवार के सदस्य अलग-अलग जगह से राशन ले सकते हैं
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, परिवार के सदस्य अगर अलग-अलग स्थानों पर रह रहे हैं तो वे अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग राशन दुकानों से अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर सकते हैं।
इस सुविधा का फायदा खास तौर पर उन परिवारों को मिल सकता है, जिनका कोई सदस्य नौकरी या पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में रहता है। हालांकि, राशन लेने के लिए लाभार्थी का पात्र राशन कार्ड से जुड़ा होना और निर्धारित पहचान सत्यापन प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
क्या है One Nation One Ration Card यानी ONORC
One Nation One Ration Card योजना का उद्देश्य पात्र राशन कार्ड धारकों को देश के अलग-अलग हिस्सों में राशन लेने की सुविधा देना है। इसके तहत पात्र लाभार्थी किसी भी उचित मूल्य की दुकान से अपने हिस्से का खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।
अंत्योदय अन्न योजना यानी AAY और प्राथमिकता वाले परिवार यानी PHH श्रेणी के पात्र राशन कार्ड धारक इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर परिवार का एक सदस्य अपने गृह जिले से बाहर नौकरी कर रहा है, तो वह वहीं की राशन दुकान से अपने पात्र हिस्से का राशन ले सकता है।
राशन कार्ड साथ नहीं है तो कैसे मिलेगा राशन
राशन लेने के लिए कार्ड की फिजिकल कॉपी अपने साथ रखना अनिवार्य नहीं है। अगर राशन कार्ड परिवार के किसी दूसरे सदस्य के पास है, तब भी पात्र सदस्य राशन प्राप्त कर सकता है।
इसके लिए नजदीकी उचित मूल्य की दुकान पर राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर की जानकारी देनी होगी। इसके बाद ई-पॉस मशीन के जरिए लाभार्थी की पहचान सत्यापित की जाती है।
आधार बायोमेट्रिक से होगा सत्यापन
राशन वितरण के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। पहचान सत्यापित होने के बाद पात्र लाभार्थी को उसके हिस्से का राशन दिया जाता है।
इस तरह ONORC की सुविधा उन लोगों के लिए खास तौर पर मददगार है, जो रोजगार या शिक्षा के कारण अपने परिवार और मूल निवास से दूर रह रहे हैं। उन्हें राशन लेने के लिए वापस अपने गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

