बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मृत शासकीय सेवकों के आश्रितों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी शासकीय कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद, उसके आश्रित परिवार से वेतन विसंगति या गलत वेतन निर्धारण के नाम पर वसूली करना पूरी तरह से अवैध और मनमाना है।
जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने राजस्व विभाग द्वारा दिवंगत तृतीय श्रेणी कर्मचारी की विधवा से 12 लाख 19 हजार 278 रुपए वसूलने के तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने इसे कानूनी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना है। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि दिवंगत कर्मचारी के रोके गए सभी फंड्स का भुगतान 40 दिनों के भीतर उनकी विधवा को किया जाए।
19 साल पुराने भुगतान के आधार पर वसूली का था आदेश
याचिकाकर्ता अंजू मिश्रा (बिलासपुर) के पति सुरेश कुमार मिश्रा राजस्व विभाग तखतपुर में तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे। 27 जून 2025 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद, तखतपुर तहसीलदार ने 10 मार्च 2026 को आदेश जारी कर कहा कि वर्ष 2006 से 2025 तक (लगभग 19 साल) सुरेश मिश्रा को गलत वेतन निर्धारण के कारण 12.19 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया है, जिसकी वसूली पत्नी से की जाएगी। इस आदेश के खिलाफ विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
जीवनकाल में कोई नोटिस नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी के जीवित रहते विभाग ने कभी भी अतिरिक्त भुगतान या गलत वेतन निर्धारण की सूचना उन्हें नहीं दी थी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों से अतिरिक्त भुगतान की वसूली कानूनन प्रतिबंधित है, खासकर यदि भुगतान 5 वर्ष से अधिक पुराना हो। कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को बिना सुनवाई का अवसर दिए सीधे वसूली का आदेश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।

