नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत कोष यानी PM CARES Fund एक बार फिर चर्चा में है। सामने आई जानकारी के मुताबिक इस कोष में करीब 8,452 करोड रुपये की राशि उपलब्ध है और इसका लगभग 93 फीसदी हिस्सा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया है।
FD में रकम रखने से एक ओर मूल राशि को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, वहीं जमा राशि पर ब्याज भी मिलता है। इसी वजह से PM CARES Fund में जमा रकम और उससे होने वाली ब्याज आय को लेकर एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा शुरू हो गई है।
कुल रकम का बडा हिस्सा बैंक FD में, सुरक्षित निवेश को दी गई प्राथमिकता
रिपोर्ट के मुताबिक PM CARES Fund की करीब 93 फीसदी राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है। FD को सामान्य तौर पर कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों में गिना जाता है। इसमें निर्धारित अवधि के लिए राशि जमा की जाती है और बैंक तय दर के अनुसार ब्याज देता है।
बडे राहत कोष के मामले में ऐसी व्यवस्था का एक उद्देश्य मूल राशि को सुरक्षित रखते हुए उस पर नियमित आय हासिल करना भी हो सकता है। साथ ही जरूरत के समय फंड की राशि का इस्तेमाल किया जा सके, इसका भी ध्यान रखा जाता है।
FD से हर साल मिल रहा ब्याज, अतिरिक्त आय का स्रोत बनी जमा रकम
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंक FD में रखी राशि से हर साल करोडों रुपये का ब्याज प्राप्त हो रहा है। इस तरह फंड की मूल राशि के अलावा ब्याज से मिलने वाली रकम भी इसके कुल वित्तीय संसाधनों का हिस्सा बनती है।
ऐसे राहत कोष के लिए ब्याज से मिलने वाली आय का महत्व इसलिए भी बढ जाता है, क्योंकि इससे बिना मूल राशि को खर्च किए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान क्यों बनाया गया था PM CARES Fund
PM CARES Fund की स्थापना मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान की गई थी। उस समय देश को स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत थी। अस्पतालों की क्षमता बढाने, मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने, ऑक्सीजन व्यवस्था मजबूत करने और दूसरी आपात जरूरतों के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता सामने आई थी।
इसी पृष्ठभूमि में इस कोष की शुरुआत आपात परिस्थितियों में राहत और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।
आम लोगों से लेकर कंपनियों तक ने दिया था योगदान
PM CARES Fund में देश के आम नागरिकों के साथ कई कंपनियों, संस्थानों और संगठनों ने भी योगदान किया। कॉरपोरेट क्षेत्र की कई कंपनियों ने CSR के तहत इसमें राशि दी, जबकि आम लोगों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग किया।
इस वजह से फंड में जमा राशि, उसके निवेश और खर्च का विवरण समय-समय पर सार्वजनिक तथा राजनीतिक चर्चा का विषय बनता रहा है।
कोरोना काल में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं पर हुआ इस्तेमाल
PM CARES Fund से कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सहायता दिए जाने की जानकारी सामने आती रही है। इसमें वेंटिलेटर की खरीद, ऑक्सीजन प्लांट और अन्य चिकित्सा संसाधनों के लिए वित्तीय सहायता शामिल रही।
आपात परिस्थितियों में राहत और सहायता से जुडे दूसरे कार्यों के लिए भी फंड का इस्तेमाल किया गया है।
फंड की पारदर्शिता को लेकर क्यों होती रही है राजनीतिक बहस
PM CARES Fund के संचालन, पारदर्शिता और वित्तीय जानकारी को लेकर राजनीतिक स्तर पर लगातार बहस होती रही है। विपक्षी दल समय-समय पर फंड से जुडी अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते रहे हैं।
दूसरी ओर सरकार का पक्ष रहा है कि PM CARES Fund एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है और इसका संचालन निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है। सरकार यह भी कहती रही है कि फंड का इस्तेमाल इसके तय उद्देश्यों के अनुरूप आपात जरूरतों और सहायता कार्यों में किया जाता है।
बडे राहत कोष में FD का विकल्प क्यों चुना जाता है
किसी बडे राहत कोष के लिए निवेश का चुनाव करते समय जोखिम, पूंजी की सुरक्षा और जरूरत के समय धन की उपलब्धता जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। FD में राशि रखने से अपेक्षाकृत स्थिर ब्याज आय प्राप्त होती है और बाजार आधारित निवेश की तुलना में जोखिम सीमित रहता है।
हालांकि किसी भी सार्वजनिक फंड के मामले में केवल निवेश का तरीका ही नहीं, बल्कि धन के इस्तेमाल और उससे जुडी जवाबदेही भी महत्वपूर्ण होती है।
8,452 करोड रुपये की राशि और 93 फीसदी FD निवेश ने फिर बढाई चर्चा
PM CARES Fund में करीब 8,452 करोड रुपये उपलब्ध होने और लगभग 93 फीसदी राशि FD में रखे जाने की जानकारी सामने आने के बाद फंड एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।
मूल राशि की सुरक्षा, FD से मिलने वाली ब्याज आय और आपात परिस्थितियों में धन के इस्तेमाल को लेकर आगे भी नजर बनी रहने की संभावना है। बडे सार्वजनिक राहत कोष के मामले में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और जरूरत के समय संसाधनों की उपलब्धता ऐसे विषय हैं, जिन पर लगातार सार्वजनिक निगरानी बनी रहती है।

