मुरैना: चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और उसके परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद वन विभाग ने चंबल के घाटों से लेकर रेत परिवहन के संभावित रास्तों तक निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत 102 वनरक्षकों को हथियारों के साथ तैनात करने का फैसला किया गया है।
करीब 30 घाटों पर विशेष नजर, रेत माफिया की गतिविधियों पर होगी निगरानी
चंबल नदी के करीब 30 घाट ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इन संवेदनशील स्थानों के साथ उन रास्तों पर भी नजर रखी जाएगी, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से निकाली गई रेत को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए किए जाने की आशंका है।
वन विभाग के वनरक्षक घाटों पर गतिविधियों की निगरानी करने के साथ संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर भी नजर रखेंगे।
तीन स्तर की निगरानी व्यवस्था, हर घाट की तैयार होगी डिजिटल रिपोर्ट
अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तीन स्तर पर निगरानी टीमें गठित की गई हैं। मुरैना, सबलगढ़, अंबाह और जौरा क्षेत्रों में पहली टीम सक्रिय रहेगी। इसमें राजस्व, पुलिस, खनिज और वन विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल होंगे।
टीमें प्रत्येक घाट का निरीक्षण कर GPS लोकेशन के साथ तस्वीरें और 360 डिग्री वीडियो रिकॉर्ड करेंगी। निरीक्षण रिपोर्ट सप्ताह में दो बार संबंधित SDM तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद SDM महीने में दो बार जिला स्तरीय टीम को रिपोर्ट भेजेंगे।
राजघाट और बरवासिन समेत संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से सुरक्षा बल तैनात
वन विभाग के मुताबिक, चंबल नदी के राजघाट, बरवासिन घाट और हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में पहले से ही SAF के जवान तैनात हैं। अब अतिरिक्त वनरक्षकों की तैनाती से निगरानी का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र को भी विशेष निगरानी में रखा जा रहा है, क्योंकि यहां अवैध रेत उत्खनन से नदी के पर्यावरण और जलीय जीवों पर असर पड़ने की चिंता रहती है।
प्रशासन के दावों के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बनी सवाल
प्रशासन का कहना है कि चंबल से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद घाटों और रेत परिवहन वाले रास्तों पर रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
रेत की बढ़ती कीमतों के बीच अवैध कारोबार में माफिया के दोबारा सक्रिय होने की आशंका भी जताई जा रही है। यही वजह है कि प्रशासन अब निगरानी व्यवस्था को सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं रखना चाहता।
कलेक्टर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगी निगरानी की रिपोर्ट
नई व्यवस्था के तहत नियमित निरीक्षण और कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। प्रशासनिक टीमें अवैध गतिविधियों की जानकारी जुटाकर उच्च स्तर तक रिपोर्ट भेजेंगी। मुरैना के साथ श्योपुर और भिंड जिलों में भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी है।
अब चुनौती यह है कि कागज पर तैयार की गई निगरानी व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। चंबल के घाटों पर लगातार निगरानी और अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई ही यह तय करेगी कि नदी से रेत के अवैध कारोबार पर वास्तव में कितना अंकुश लग पाता है।

