नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब और गहरा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में बुधवार को विपक्षी दलों की बैठक हुई। बैठक के बाद विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी की।
विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर तत्काल बातचीत की मांग कर रहे हैं।
बैठक में तय हुई आगे की रणनीति
सेंट्रल दिल्ली में हुई बैठक में INDIA गठबंधन से जुड़े कई दलों के सांसद शामिल हुए। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे जाने वाले पत्र पर चर्चा हुई। विपक्ष इस पत्र के जरिए SIR से जुडे सवालों पर अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल बैठक की मांग करने की तैयारी में है।
इसके अलावा विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए भी समय मांगा है। विपक्ष चाहता है कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अपने मुद्दों को राष्ट्रपति के सामने भी रखा जाए।
राहुल गांधी ने फिर उठाया मुख्य चुनाव आयुक्त का मुद्दा
बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को एक दिन पहले चुनाव आयोग के कार्यालय तक प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। राहुल गांधी ने अपने खिलाफ संभावित FIR का जिक्र करते हुए कहा कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और हर FIR को एक तरह के मेडल के तौर पर देखते हैं।
विपक्ष बोला, SIR पर चाहिए सीधा जवाब
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष SIR से जुड़े अपने सवालों का स्पष्ट जवाब चाहता है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग से मिलने और अपनी आपत्तियां रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को संसद के साथ सड़क पर भी उठाया जाता रहेगा।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी विपक्षी दलों की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर साथ हैं और साझा तौर पर अपनी मांग उठा रहे हैं।
मंगलवार को भी हुआ था विरोध प्रदर्शन
इससे एक दिन पहले मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। दिल्ली पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया था।
इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया। प्रदर्शन कई घंटे तक चला और बाद में कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया।
चुनाव आयोग ने बताई अपनी प्रक्रिया
मंगलवार की घटना पर चुनाव आयोग का पक्ष विपक्ष से अलग रहा। आयोग ने कहा कि शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से औपचारिक बैठक का अनुरोध नहीं मिला था।
बाद में विपक्षी सांसदों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन एनेक्सी में मुलाकात की मांग की। आयोग ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऐसी बैठक निर्वाचन सदन में होती है। आयोग ने प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया।
SIR को लेकर क्या है विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही विपक्ष प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं होने का सवाल भी उठा रहा है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और अपनी प्रक्रिया तथा तय नियमों का बचाव किया है।
अब जंतर-मंतर पर होगी अगली परीक्षा
बुधवार की बैठक के बाद जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को विपक्ष की मंगलवार की कार्रवाई के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। संभावित मार्च और प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस भी सतर्क है। करीब 300 विपक्षी सांसदों के इसमें शामिल होने की संभावना जताई गई थी।
विपक्ष अब चुनाव आयोग को पत्र भेजने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगने के जरिए SIR के मुद्दे को आगे बढाने की तैयारी में है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का छत्तीसगढ दौरा भी टला
इस राजनीतिक टकराव के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ दौरा भी स्थगित कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने इसके पीछे अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया है।
फिलहाल SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग विपक्ष के पत्र और मुलाकात की मांग पर क्या फैसला लेता है और जंतर-मंतर पर होने वाला प्रदर्शन किस दिशा में आगे बढता है।

