भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान सीजेपी से जुड़े प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मुद्दों पर चर्चा का सबसे उपयुक्त मंच संसद है और सरकार पर दबाव बनाने के लिए धरना या प्रदर्शन का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए।
संसद में उठने चाहिए जनहित के मुद्दे
कंगना रनौत ने कहा कि संसद का उद्देश्य विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करना, सवाल उठाना और जवाब मांगना है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याएं संसद के भीतर उठानी चाहिए, क्योंकि यही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
आंदोलन के तरीके पर जताई असहमति
कंगना ने कहा कि रैली, धरना या रास्ता रोककर सरकार पर दबाव बनाना उचित तरीका नहीं है। उनका कहना था कि जनता ने सरकार को काम करने का जनादेश दिया है और यदि किसी को व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव लड़कर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर दबाव डालकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी पद पर कौन रहे या कौन हटे।
सनातन संस्कृति पर भी रखा पक्ष
अपने बयान के दौरान कंगना रनौत ने यह भी कहा कि समय के साथ अधिक लोग भारतीय जनता पार्टी और सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने इसे भारत की मूल सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि अन्य कई विचार बाहरी प्रभावों से जुड़े हैं।
प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव
यह बयान ऐसे समय सामने आया, जब सीजेपी से जुड़े प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया। बाद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

