नई दिल्ली। तहलका पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गोवा सरकार को नोटिस जारी किया है। तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 2013 के एक यौन शोषण मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि अदालत के पहले के निर्देश के मुताबिक तेजपाल सरेंडर कर चुके हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार से जवाब मांगा और कहा कि मामले की अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय की जाएगी।
हाईकोर्ट ने पलटा था निचली अदालत का बरी करने का फैसला
यह मामला वर्ष 2013 का है और एक होटल की लिफ्ट में जूनियर महिला सहयोगी के साथ दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा है। मामले में निचली अदालत ने तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था।
इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया। हाईकोर्ट ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किया सरेंडर
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया था कि अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले उन्हें सरेंडर करना होगा।
अदालत ने तत्काल राहत देने की उनकी मांग स्वीकार नहीं की थी और स्पष्ट किया था कि सरेंडर प्रमाणपत्र दाखिल किए जाने के बाद ही सजा के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई की जाएगी।
मापुसा अदालत में पेश होने के बाद जेल भेजे गए थे तेजपाल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेजपाल ने मापुसा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें उत्तरी गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले उन्हें 22 सितंबर या उससे पहले सरेंडर प्रमाणपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी साफ किया था कि 10 साल की सजा के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई के लिए सरेंडर की शर्त पूरी करना जरूरी होगा।
अब गोवा सरकार के जवाब के बाद आगे बढ़ेगी सुनवाई
शुक्रवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को नोटिस जारी कर उसका पक्ष मांगा है। अब सरकार के जवाब के बाद अदालत तेजपाल की याचिका पर आगे सुनवाई करेगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।

