अंबिकापुर। एरियर भुगतान के नाम पर रिश्वत मांगने और लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने आरोपी कर्मचारी को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह फैसला भ्रष्टाचार के मामले में विशेष न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने और सजा सुनाए जाने के बाद लिया गया।
रिश्वत लेते हुए ACB ने किया था गिरफ्तार
मामला वाड्रफनगर के इंजानी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है, जहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम बीईओ कार्यालय में संलग्न था। 13 अगस्त 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उसे 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया और 48 घंटे से अधिक समय तक जेल में रहने के कारण 21 अगस्त 2024 को निलंबित कर दिया गया था।
20 हजार रुपये की मांग, 12 हजार लेते हुए फंसा
अदालत में हुई सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि आरोपी ने प्रार्थी नितेश रंजन पटेल से एरियर भुगतान कराने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सौदे के तहत 12 हजार रुपये लेते समय ACB की टीम ने उसे ट्रैप कर गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट ने सुनाई 3 साल की कठोर कैद
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बलरामपुर-रामानुजगंज ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बिना विभागीय जांच के सेवा से हटाया गया
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने के बाद अलग से विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए आरोपी कर्मचारी गौतम सिंह आयम को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

