दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान हुए तरुण बुटोलिया हत्याकांड में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मार्च 2026 में हुई हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए एक किशोर के जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड को प्रशासन ने रद्द कर दिया है। इस दस्तावेज में आरोपी को नाबालिग बताया गया था।
गुरुवार को जारी प्रशासनिक आदेश के अनुसार, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने संबंधित जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड को निरस्त करने की कार्रवाई की है। अब आरोपी की उम्र निर्धारित करने के लिए अन्य उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
नाबालिग साबित करने वाले बर्थ सर्टिफिकेट पर उठे सवाल
जिस जन्म प्रमाणपत्र को रद्द किया गया है, उसमें आरोपी फैजान की जन्म तिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज थी। इसी रिकॉर्ड के आधार पर उसे नाबालिग बताए जाने का दावा किया गया था।
प्रशासनिक जांच के दौरान जन्म के देर से किए गए पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक, जिस आदेश के आधार पर यह जन्म प्रमाणपत्र जारी किया गया था, उसे वैध नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
दो बर्थ सर्टिफिकेट और दो आधार कार्ड होने की बात सामने आई
पश्चिमी जिले के एक अधिकारी के मुताबिक, जांच में आरोपी के पास दो जन्म प्रमाणपत्र और दो आधार कार्ड होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से एक जन्म प्रमाणपत्र में उसे नाबालिग दर्शाया गया था।
प्रशासनिक जांच के बाद अधिकारियों ने दिल्ली नगर निगम को संबंधित रिकॉर्ड पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। अब रद्द किए गए प्रमाणपत्र के आधार पर आरोपी की उम्र तय नहीं की जा सकेगी। उसकी उम्र निर्धारित करने के लिए दूसरे वैध दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य देखे जाएंगे।
SDM की जांच के बाद MCD को भेजा गया था पत्र
विकासपुरी के SDM की ओर से दिल्ली नगर निगम के पश्चिमी जोन के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण विभाग को पत्र भेजा गया था। इसमें जन्म पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड और उसे जारी करने के आधार की जांच का उल्लेख किया गया था।
जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि जन्म का देर से पंजीकरण कराने से संबंधित जिस आदेश के आधार पर प्रमाणपत्र बनाया गया था, वह मान्य नहीं था। इसी आधार पर जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड रद्द करने की कार्रवाई की गई।
रंगीन पानी का गुब्बारा गिरने के बाद शुरू हुआ था विवाद
पुलिस के मुताबिक, तरुण बुटोलिया हत्याकांड से जुड़ा विवाद होली के दौरान शुरू हुआ था। बताया गया कि बुटोलिया परिवार की एक नाबालिग लड़की ने छत से रंगीन पानी का गुब्बारा फेंका था। यह गुब्बारा एक महिला पर गिरा, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।
दिल्ली पुलिस की मई में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, विवाद आगे बढ़ने पर जाति आधारित कथित अपशब्दों को लेकर भी तनाव पैदा हुआ। पुलिस के आरोपपत्र में दावा किया गया है कि बाद में यही विवाद हिंसक घटना में बदल गया और तरुण बुटोलिया की हत्या कर दी गई।
18 लोगों को बनाया गया आरोपी, जांच में कई पहलू शामिल
पुलिस ने इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया है। आरोपपत्र के मुताबिक, आरोपियों पर गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनने का आरोप भी लगाया गया है।
तरुण की हत्या के बाद पश्चिमी दिल्ली में कई दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। अब जन्म प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद जांच में आरोपी की उम्र से जुड़ा पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है। प्रशासनिक रिकॉर्ड में हुए बदलाव के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उम्र की स्थिति को स्पष्ट करेंगी।

