नई दिल्ली। राष्ट्रगान जन-गण-मन के रचयिता और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान साहित्यकार गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गुरुदेव टैगोर को याद करते हुए उनके साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक योगदान को नमन किया।
ओम बिड़ला ने बताया भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महान चेहरा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमुख शिल्पी बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि दार्शनिक, शिक्षाविद्, संगीतकार, चित्रकार, समाज सुधारक और मानवतावादी चिंतक भी थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1913 में गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर गुरुदेव ने भारतीय साहित्य को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनकी शिक्षा संबंधी सोच में व्यक्ति के स्वतंत्र विचार और संपूर्ण विकास को विशेष महत्व दिया गया था।
अमित शाह बोले- टैगोर ने भारत की आत्मा को दी आवाज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुदेव टैगोर को याद करते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने भारत की आत्मा को अभिव्यक्ति दी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नई चेतना पैदा की। उन्होंने कहा कि जन-गण-मन केवल राष्ट्रगान नहीं, बल्कि देश की एकता और आत्मगौरव का प्रतीक है।
अमित शाह ने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि टैगोर ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और शिक्षा की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का कार्य किया।
शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी ने भी दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुदेव टैगोर को महान कवि और अद्वितीय कथाकार बताते हुए कहा कि उनकी अमर रचनाएं और विचार देश की प्रगति तथा समाज के उत्थान के लिए हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान जन-गण-मन की भावना को साकार किया और भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया।
मुख्यमंत्रियों ने याद किया टैगोर का साहित्यिक योगदान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुदेव टैगोर को साहित्य, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी अमर रचनाएं भारतीय साहित्य की गौरवशाली विरासत हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि टैगोर की संस्कृति, साहित्य, शिक्षा और विचार आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरणा देते रहेंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी लेखनी को भारतीय साहित्य की वैश्विक पहचान का माध्यम बताया। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि टैगोर ने साहित्य, संगीत, कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने भी किया स्मरण
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि टैगोर ने अपने साहित्य और शिक्षा दर्शन के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। उन्होंने उनके विचारों को ज्ञान, सृजन, संवेदना और राष्ट्रप्रेम का संदेश बताया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि टैगोर की लेखनी ने भारतीय संस्कृति को नई पहचान दी और मानवता, शिक्षा तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़े उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुदेव टैगोर को राष्ट्रचेतना और मानवता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जीवन और साहित्य समाज को सेवा, कर्तव्य और सांस्कृतिक गौरव के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
टैगोर की विरासत आज भी विश्वभर में प्रेरणा का स्रोत
रवीन्द्रनाथ टैगोर का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं था। उन्होंने कविता, संगीत, शिक्षा, कला और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उनकी रचनाओं में मानवता, प्रेम, प्रकृति और विश्व बंधुत्व की भावना दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी साहित्यिक विरासत आज भी भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

