नई दिल्ली। प्रधानमंत्री पोषण (पीएम पोषण) योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र बच्चों को निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। लोकसभा में एक लिखित जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि योजना का उद्देश्य बच्चों को संतुलित आहार उपलब्ध कराना और पोषण समतुल्यता सुनिश्चित करना है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अहम जिम्मेदारी
सरकार ने स्पष्ट किया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय होने के कारण अधिकांश सरकारी स्कूल और शिक्षा बोर्ड राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधीन आते हैं। ऐसे में पीएम पोषण योजना के प्रभावी संचालन और बाल वाटिका से लेकर कक्षा 8 तक के पात्र विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की है।
प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए तय हैं ये पोषण मानक
योजना के तहत प्राथमिक कक्षाओं के प्रत्येक छात्र को प्रतिदिन एक बार गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। निर्धारित मानकों के अनुसार प्रति बच्चे को 450 कैलरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। इसके लिए भोजन में 100 ग्राम खाद्यान्न, 20 ग्राम दाल, 50 ग्राम सब्जियां तथा 5 ग्राम तेल या वसा शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
उच्चतर प्राथमिक विद्यार्थियों को मिलेगा अधिक पोषण
उच्चतर प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पोषण का स्तर और बढ़ाया गया है। इनके भोजन में प्रतिदिन प्रति छात्र 700 कैलरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 150 ग्राम खाद्यान्न, 30 ग्राम दाल, 75 ग्राम सब्जियां और 7.5 ग्राम तेल या वसा निर्धारित किया गया है। नमक और मसालों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।
स्थानीय अनाज और सब्जियों को दी जा रही प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप भोजन का मेनू तैयार करने की छूट दी है। उन्हें मोटे अनाज, स्थानीय सब्जियां, मसाले और क्षेत्र में उपलब्ध अन्य खाद्य सामग्री को भोजन में शामिल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे बच्चों को स्थानीय खान-पान के अनुरूप भोजन मिलने के साथ किसानों और स्थानीय कृषि उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
पूरक पोषण के लिए विशेष प्रावधान
योजना के अंतर्गत विद्यालय पोषण वाटिकाओं के विकास और चिन्हित जिलों में पूरक पोषण गतिविधियों के लिए कुल आवर्ती बजट का पांच प्रतिशत तक फ्लेक्सी घटक उपयोग करने की अनुमति दी गई है। कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय खान-पान, सांस्कृतिक परंपराओं और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण भी उपलब्ध करा रहे हैं।

