आज के समय में मोबाइल फोन लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। कई लोग तो बाथरूम और टॉयलेट तक भी फोन साथ लेकर जाते हैं। कुछ मिनट के लिए शुरू हुआ मोबाइल इस्तेमाल कई बार आधे घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक खिंच जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत भविष्य में गंभीर शारीरिक समस्याओं की वजह बन सकती है।
हाल ही में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। एक बुजुर्ग व्यक्ति वर्षों तक कब्ज की समस्या का इलाज कराते रहे, लेकिन असली बीमारी कुछ और निकली।
20 साल तक कब्ज का इलाज, जांच में सामने आई चौंकाने वाली वजह
जानकारी के अनुसार, 70 वर्षीय एक व्यक्ति लंबे समय से कब्ज की समस्या से परेशान थे। करीब दो दशक तक उनका इलाज चलता रहा और उन्हें आईबीएस-सी यानी कब्ज प्रधान इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का मरीज मानकर दवाइयां दी जाती रहीं।
हालांकि जब विस्तृत और विशेष जांच की गई, तब पता चला कि समस्या सामान्य कब्ज नहीं थी। डॉक्टरों ने पाया कि लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और बार-बार जोर लगाने की आदत के कारण उन्हें ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम (ODS) विकसित हो गया था।
युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है यह समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के कारण बड़ी संख्या में युवा भी टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा समय बिताने लगे हैं। यही आदत धीरे-धीरे पाचन और मलत्याग से जुड़ी गंभीर परेशानियों को जन्म दे सकती है।
मोबाइल नहीं, बल्कि लंबे समय तक बैठे रहना है असली खतरा
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के अनुसार, समस्या सीधे मोबाइल फोन से नहीं होती, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहने से पैदा होती है।
उनका कहना है कि जब व्यक्ति फोन में व्यस्त हो जाता है, तो वह शरीर के प्राकृतिक मलत्याग संकेतों को नजरअंदाज करने लगता है। इससे सामान्य बॉवेल रिफ्लेक्स प्रभावित होता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या विकसित होने लगती है।
कैसे बढ़ता है गंभीर बीमारी का खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक, टॉयलेट पर लंबे समय तक बैठे रहने से मलाशय और गुदा क्षेत्र की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। समय के साथ व्यक्ति को मल त्याग के लिए अधिक जोर लगाना पड़ता है।
लगातार ऐसा होने पर संबंधित मांसपेशियों के बीच तालमेल बिगड़ सकता है, जिससे ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम जैसी जटिल स्थिति पैदा हो सकती है। इस अवस्था में व्यक्ति को सामान्य रूप से मल त्याग करने में कठिनाई होने लगती है और कई मामलों में विशेष उपचार या थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
टॉयलेट में कितना समय बिताना माना जाता है सही?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में मल त्याग के लिए कुछ ही मिनट पर्याप्त होते हैं। यदि व्यक्ति 10 से 15 मिनट या उससे अधिक समय नियमित रूप से टॉयलेट सीट पर बिताने लगे, तो यह आदत भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है।
छोटी आदत बदलकर बच सकते हैं बड़ी परेशानी से
डॉक्टर सलाह देते हैं कि टॉयलेट जाते समय मोबाइल, टैबलेट या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को साथ ले जाने से बचें। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी।
यदि लंबे समय से कब्ज, मल त्याग में कठिनाई या बार-बार जोर लगाने जैसी समस्या बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते सही कारण की पहचान कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।

