UGC-NET 2026 : इंग्लिश परीक्षा दोबारा कराने के फैसले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला अब अहम मोड़ पर आ गया है। हाई कोर्ट ने परीक्षा आयोजित कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका जून में परीक्षा देने वाली उम्मीदवार पारुल शेओरान ने दायर की है।जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और NTA को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
9 सितंबर को होनी है इंग्लिश और कॉमर्स की दोबारा परीक्षा
NTA के कार्यक्रम के अनुसार इंग्लिश और कॉमर्स विषय की दोबारा परीक्षा 9 सितंबर को आयोजित की जानी है। वहीं सोशियोलॉजी का री-एग्जाम 10 सितंबर को होगा।इससे पहले 31 अगस्त को हाई कोर्ट ने अधिकारियों से संबंधित उम्मीदवारों की परीक्षा फीस वापस करने के मुद्दे पर निर्णय लेने को कहा था।
उम्मीदवार ने री-एग्जाम के आदेश को चुनौती दी
पारुल शेओरान ने NTA के 16 अगस्त को जारी उस नोटिस को रद्द करने की मांग की है, जिसमें इंग्लिश विषय की परीक्षा दोबारा आयोजित करने की जानकारी दी गई थी।याचिका में आरोप लगाया गया है कि री-एग्जाम का फैसला मनमाने और अनुचित तरीके से लिया गया। उम्मीदवार ने इसे प्रक्रिया के लिहाज से गलत बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए समानता के अधिकार का उल्लंघन भी बताया है।याचिका के मुताबिक, परीक्षा दोबारा कराने के फैसले का आधार बनने वाली जानकारी उम्मीदवारों के सामने स्पष्ट नहीं की गई और UGC-NET के सूचना बुलेटिन में निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
पहले हो चुकी परीक्षा के नतीजे जारी करने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इंग्लिश विषय की जो परीक्षा पहले ही आयोजित हो चुकी है, उसके परिणाम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घोषित करने या उस पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।
प्रश्नपत्रों में मिली थीं कई तरह की गलतियां
NTA ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप, असिस्टेंट प्रोफेसर पद की पात्रता और PhD में दाखिले के लिए 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों में UGC-NET परीक्षा आयोजित की थी।बाद में NTA को तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में कथित त्रुटियों को लेकर कई शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट में प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद से जुड़ी कई गलतियां मिलने की बात कही गई।रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख विद्वानों के नामों की स्पेलिंग गलत थी, पुस्तकों के शीर्षकों में त्रुटियां थीं और प्रश्नों की भाषा, व्याकरण, लिंग-वचन, विराम चिह्न तथा तकनीकी शब्दावली से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। इसके अलावा पहले पूछे जा चुके कई प्रश्नों के दोहराव का भी उल्लेख किया गया।अब दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केंद्र और NTA के जवाब पर नजर है। वहीं 9 सितंबर को प्रस्तावित री-एग्जाम को लेकर उम्मीदवारों के बीच भी इस मामले की अगली कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।

